अस्पताल के भारी- भरकम बिल को चुकाना हर किसी के लिए मुसीबत की तरह होता है. यहां तक कि यदि किसी के पास हेल्थ इंश्योरेंस भी है तो उसमें भी काफी समय लग ही जाता है. इसी स्थिति को देखते हुए और प्रोसेस में पारदर्शिता के मकसद से IRDAI यानी भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण ने एक नया नियम लागू करने के बारे में सोचा है. जिससे क्लेम की प्रक्रिया आसान होगी साथ ही साथ हॉस्पिटल अपना मनमानी बिल नहीं वसूल पाएंगे. इसके लिए एक नई उप कमेटी का गठन किया गया है.
नई कमेटी का गठन
IRDAI ने अस्पतालों के मनमानी बिल पर रोक लगाने के लिए नई उप कमेटी का गठन किया है. ये उप कमेटी हेल्थ इंश्योरेंज के जरिए इनोवेशन, वाइडर कवरेज, बेहतर रिस्क और बेहतर फाइनेंशियल प्रोटेक्शन को बढ़ावा देने के लिए रेग्युलेटरी, पॉलिसी और ऑपरेशनल मेजर्स को रेकमंड करेगी. इस कमेटी के गठन का मकसद उपभोक्ताओं के लिए प्रोसेस में पारदर्शिता लाना और पॉलिसीधारकों के लिए इंश्योरेंस को ज्यादा आसान बनाना है.
IRDAI का मकसद?
इस कमेटी के गठन के साथ ही इरडा का नए नियमों के साथ मकसद साफ है. उन्हें लोगों के लिए क्लेम एक्सपीरियंस को सुगम बनाना है. हॉस्पिटल के टैरिफ में सुधार करना है, जिससे वो मनमानी फीस मरीजों से ना वसूल पाएं. इससे डिजिटल सिस्टम भी दुरुस्त होगा. लोगों के साथ धोखाधड़ी नहीं होगी. इसके अलावा पूरी प्रोसेस पारदर्शिता के साथ होगी, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा.
एक्सपर्ट की मानें तो…
प्रोबस के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश गोयल का इसे लेकर कहना है कि, ‘फिलहाल सबसे बड़ी परेशानी यही है कि लोगों को लगता है कि इंश्योरेंस होने की वजह से उनसे ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं. नई कमेटी का सबसे पहला काम इन टैरिफ और अस्पतालों के नेटवर्क की विसंगतियों को दुरुस्त करना है. इसका सीधा फायदा ये होगा कि इलाज की कीमतें सही होंगी और बिलिंग भी एक जौसी ही होगी.