8th Pay Commission: क्या है ICMR का 3490 कैलोरी फॉर्मूला, अब खाने की थाली तय करेगी आपकी सैलरी?

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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच लगातार चर्चा चल रही है. कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी को लेकर है. इसी बीच एक ऐसा फॉर्मूला चर्चा में आ गया है, जिसका सीधा संबंध कर्मचारियों की खाने की थाली से है. दरअसल, राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र ने सरकार को दिए अपने ज्ञापन में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के 3490 कैलोरी फॉर्मूले को वेतन निर्धारण का आधार बनाने की मांग की है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना चाहती है तो न्यूनतम वेतन तय करते समय उनकी जरूरतों को ध्यान में रखना होगा और इनमें सबसे पहली जरूरत भोजन और पोषण की है.

क्या है ICMR का 3490 कैलोरी फॉर्मूला?

ICMR देश की प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था है, जो समय-समय पर लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान देती है. इसके अनुसार एक औसत कामकाजी व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 3490 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है. यह कैलोरी सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने, काम करने की क्षमता बनाए रखने और पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी मानी जाती है. कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जब सरकार न्यूनतम वेतन तय करती है तो उसे यह देखना चाहिए कि कर्मचारी अपने परिवार के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन खरीद पाने में सक्षम है या नहीं. अगर वेतन इतना कम हो कि परिवार की बुनियादी जरूरतें भी पूरी न हों, तो वेतन वृद्धि का मकसद अधूरा रह जाता है.

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खाने की थाली से सैलरी का क्या संबंध?

पहली नजर में यह सवाल अजीब लग सकता है कि खाने की थाली का सैलरी से क्या लेना-देना है. लेकिन वेतन आयोगों के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि न्यूनतम वेतन तय करने में कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों को हमेशा आधार बनाया गया है. इन जरूरतों में भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और अन्य जरूरी खर्च शामिल होते हैं. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में महंगाई पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है. ऐसे में पुराने मानकों से कर्मचारियों के खर्च का सही आकलन नहीं हो सकता. यही वजह है कि अब ICMR के आधुनिक पोषण मानकों को शामिल करने की मांग की जा रही है. इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि एक परिवार को स्वस्थ जीवन जीने के लिए हर महीने खाने-पीने पर कितना खर्च करना पड़ता है और उसी आधार पर न्यूनतम वेतन तय किया जाए.

69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग क्यों?

JCM ने सरकार को दिए ज्ञापन में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन करीब 69,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान वेतन संरचना बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी पीछे रह गई है. उनका तर्क है कि आज के समय में सिर्फ राशन और भोजन ही महंगा नहीं हुआ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज, किराया, बिजली-पानी, इंटरनेट, मोबाइल और यात्रा जैसे खर्च भी तेजी से बढ़े हैं. ऐसे में कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए अधिक वेतन की जरूरत है.

फिटमेंट फैक्टर पर भी टिकी हैं उम्मीदें

8वें वेतन आयोग की चर्चा में फिटमेंट फैक्टर भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है. फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को बढ़ाया जाता है. हालांकि अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि फिटमेंट फैक्टर ऐसा हो जिससे न्यूनतम वेतन में बड़ा इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि अगर सरकार कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विचार करती है तो बेसिक सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

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कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह बहस?

सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के साथ जीवनयापन का खर्च भी तेजी से बढ़ा है. ऐसे में सिर्फ मामूली वेतन वृद्धि से काम नहीं चलेगा. वे चाहते हैं कि वेतन निर्धारण का तरीका भी समय के साथ बदले. ICMR के 3490 कैलोरी फॉर्मूले को शामिल करने की मांग इसी सोच का हिस्सा है. 

सरकार का क्या है रुख?

फिलहाल सरकार की तरफ से ICMR के 3490 कैलोरी फॉर्मूले या 69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. 8वें वेतन आयोग से जुड़ी कई सिफारिशों और मांगों पर अभी चर्चा चल रही है. अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कर्मचारियों की सभी मांगें स्वीकार होंगी या नहीं.

लाखों कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग पर

देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं. उन्हें उम्मीद है कि इस बार सिर्फ वेतन बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा. अगर वेतन निर्धारण में ICMR के पोषण मानकों जैसे आधुनिक पैमानों को शामिल किया जाता है तो यह कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है. इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत होगी. 



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