Why Do I Crave Sugar After Eating A Full Meal: खाना खत्म होते ही कुछ मीठा खाने का मन करना हममें से ज़्यादातर लोगों की आदत बन चुकी है. चाहे रोज़ का साधारण दाल-रोटी-सब्जी वाला खाना हो या फिर कोई खास दावत, आखिर में मिठाई का इंतजार जैसे तय ही रहता है. पेट भरा होने के बावजूद कुछ मीठा हो जाए वाली फीलिंग अपने आप आ जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये तलब क्यों होती है? आयुर्वेद इसके पीछे एक दिलचस्प वजह बताता है.
हमें मीठा कब खाना चाहिए?
TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, असली गलती हमारी खाने की आदत में छिपी है. जहां आजकल हम खाना खत्म करने के बाद मिठाई खाते हैं, वहीं आयुर्वेद कहता है कि मीठा स्वाद भोजन की शुरुआत में लेना चाहिए. माना जाता है कि मीठा स्वाद सबसे पहले लेने से लार और पाचन रस जल्दी सक्रिय हो जाते हैं, जिससे पाचन बेहतर होता है. अगर यही मिठाई आखिर में खाई जाए, तो यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देती है.
यही वजह है कि खाना खाने के बाद जब आप मीठा खाते हैं, तो शरीर को तुरंत ऊर्जा का झटका मिलता है, लेकिन इससे पाचन अग्नि कमजोर पड़ सकती है. आयुर्वेद में इसे अग्नि कहा जाता है, जो हमारे पूरे पाचन तंत्र को नियंत्रित करती है. जब आप अंत में ज्यादा चीनी या डेज़र्ट लेते हैं, तो यह अग्नि को दबा देती है, जिससे गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं होने लगती हैं. शरीर इस असंतुलन को महसूस करता है और बार-बार मीठा मांगने लगता है.
क्यों होती है क्रेविंग?
आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथों में भी खाने के क्रम का जिक्र मिलता है. इसमें बताया गया है कि भोजन की शुरुआत मीठे स्वाद से करनी चाहिए, फिर बीच में खट्टा और नमकीन और अंत में कड़वा, तीखा व कसैला स्वाद लेना चाहिए. ऐसा करने से शरीर के तीनों दोष, वात, पित्त और कफ संतुलित रहते हैं. अगर यह क्रम बिगड़ता है, तो शरीर में असंतुलन पैदा होता है और क्रेविंग बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, आधुनिक खानपान भी इस आदत को बढ़ाता है. जब हम ज्यादा कार्बोहाइड्रेट या भारी भोजन करते हैं, तो शरीर को उसे संतुलित करने के लिए तुरंत मीठा चाहिए होता है. यही कारण है कि भारी या मांसाहारी खाने के बाद अक्सर मिठाई की इच्छा ज्यादा होती है.
मीठा पूरी तरह से खराब नहीं
हालांकि, आयुर्वेद यह भी मानता है कि मीठा पूरी तरह से खराब नहीं है. सही मात्रा और सही समय पर लिया गया मीठा शरीर के लिए फायदेमंद भी हो सकता है. लेकिन रिफाइंड शुगर और भारी डेजर्ट की बजाय प्राकृतिक मिठास जैसे फल या कुछ हल्का मीठा विकल्प बेहतर होता है. खाना खाने के बाद मीठा खाने की तलब सिर्फ आदत नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन का संकेत भी हो सकती है. अगर आप इस क्रेविंग को समझकर अपनी खाने की आदत में थोड़ा बदलाव करें, तो ना सिर्फ पाचन बेहतर होगा, बल्कि बार-बार मीठा खाने की इच्छा भी अपने आप कम हो जाएगी.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.