- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर ऊर्जा कीमतें बढ़ाईं।
- अमेरिकी नाकाबंदी से तेल, गैस की कीमतें और बढ़ेंगी।
- ईरान का मानना है कि समय उसके पक्ष में है।
- संकट से विकासशील एशिया में विकास दर 1% घट सकती है।
Global Energy Crisis: ट्रम्प खुद को “आर्ट ऑफ द डील” का मास्टर बताते हैं. हालांकि, धैर्यपूर्ण बातचीत उनका स्टाइल नहीं है. ईरान के साथ शांति वार्ता के एक असफल वीकेंड के बाद, अमेरिका ने फिर से बढ़त लेते हुए ब्लॉकेड की घोषणा कर दी है. यह नई रणनीति उल्टी पड़ने वाली है.
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें आसमान छू रही हैं. लेकिन अमेरिकी ब्लॉकेड से तेल और गैस की कीमतें और भी ऊपर जा रही हैं.
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
ईरान के खाड़ी में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करने का खतरा भी बढ़ गया है. इस विषय पर ईरानी मानते हैं कि इस टकराव में समय उनके पक्ष में है और वे शायद सही हैं. जितना लंबा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा, अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव उतना ही बढ़ेगा. नतीजतन, जब भी शांति वार्ता दोबारा शुरू होगी, ईरान की बातचीत की स्थिति और मजबूत होगी.
क्या होगा असर?
पेट्रोल पंप पर कीमत बढ़ना तो सिर्फ शुरुआत है. जेट ईंधन की कमी से हवाई यात्रा प्रभावित होगी, जो यूरोप में गर्मियों के महत्वपूर्ण पर्यटन सीजन से पहले पर्यटन को नुकसान पहुंचाएगी. हीलियम जिसका बड़ा उत्पादन कतर में होता है की कमी से सेमीकंडक्टर उत्पादन रुक सकता है.
उर्वरक की कमी से खाद्य उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे और महंगाई बढ़ेगी. एशियन डेवलपमेंट बैंक ने हाल ही में अनुमान लगाया है कि इस ऊर्जा संकट से विकासशील एशिया में इस साल विकास दर 1 प्रतिशत से ज्यादा गिर सकती है.
वैश्विक ऊर्जा पर गहराया संकट
दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने को Fatih Birol ने इतिहास का सबसे बड़ा वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा संकट बताया है. International Energy Agency के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि मौजूदा स्थिति 1970 के दशक के तेल संकट से भी ज्यादा गंभीर हो सकती है. जिसने उस समय कई देशों में महंगाई, मंदी और ईंधन की कमी जैसी समस्याएं पैदा कर दी थी.
ट्रंप की प्लानिंग
ट्रंप की योजना यह मानी जा रही है कि नाकेबंदी के जरिए Iran पर इतना आर्थिक दबाव बनाया जाए कि वह जल्द ही पीछे हटने को मजबूर हो जाए. हालांकि, मौजूदा हालात बताते हैं कि यह इतना आसान नहीं है. ईरान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है.
ईरान के पास फिलहाल कुछ आर्थिक सहारा भी मौजूद है. उसने हाल के समय में ऊंची कीमतों पर तेल बेचकर अच्छी आमदनी की है और पाइपलाइन के जरिए गैस निर्यात से भी कुछ कमाई कर रहा है.
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