हर महिने 5,000 रुपये निवेश के साथ करोड़पति बनने का मौका, जानें कैसै?

c892a46b94571b20d403ed3c3f2adb9f17802196479881416 original


SIP Mutual Fund News: आजकल हर कोई अपने उज्जवल भविष्य के लिए SIP करता है.  यह फॉर्मूला हमेशा सरल लगता है. म्यूचुअल फंड एसआईपी शुरू करें, 10 साल तक निवेशित रहें, बाजार के उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करें, और धन अपने आप बढ़ता जाएगा.  सरल भाषा में कहे ‘SIP ही भविष्य है’ वित्तीय एक्सपर्ट इस पर पूरा भरोसा करते हैं. सोशल मीडिया कैलकुलेटर धन प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बना देते हैं. 

एक व्यक्ति अलग-अलग इक्विटी म्यूचुअल फंड में 5,000 रुपए की मासिक एसआईपी शुरू करता है. कुछ सालों बाद, शेयर बाजार धराशायी हो जाता है. पोर्टफोलियो का मूल्य गिर जाता है. खबरों में दहशत का माहौल छा जाता है. अचानक, एसआईपी जारी रखना बेतुका लगने लगता है. लेकिन निवेशक फिर भी निवेश जारी रखता है.

धनवान बनने की गारंटी नहीं देता निवेश!

जब कीमतें कम थीं तब ज्यादा म्यूचुअल फंड यूनिट्स खरीदी गईं, जिससे बाजार के आखिर में ठीक होने पर लंबे समय तक चलने वाले नतीजे बेहतर हुए. हालांकि, एक्सपर्ट एक बड़ी गलतफहमी के प्रति आगाह करते हैं. 10 साल आपके अवसरों को बेहतर बना सकते हैं. हालांकि यह धनवान बनने की गारंटी नहीं देता. 

एक बात गौर करने वाली बात यह कि, अगर आपको लगता है कि 10 साल तक SIP के ज़रिए निवेश करने से मुनाफ़ा अपने आप ही सुनिश्चित हो जाता है, तो विशेषज्ञों का कहना है कि इस विचार को हकीकत से रूबरू कराने की ज़रूरत है. 

एक्सपर्ट ने क्या कहा? 

बैंकबाज़ार के सीईओ अधिल शेट्टी कहते हैं, ‘इक्विटी एसआईपी में 10 साल तक निवेशित रहने से सकारात्मक रिटर्न मिलने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है, लेकिन इसे मुनाफ़े की गारंटी नहीं समझना चाहिए’. साथ ही इक्विटी बाज़ार उतार-चढ़ाव, वैश्विक घटनाओं और निवेशकों की भावनाओं से जुड़े रहते हैं.

शेट्टी के मुताबिक, एसआईपी निवेशकों के पक्ष में जो बात काम करती है, वह है लंबे समय तक चलने वाला निवेश और रुपए की लागत का औसत निकालना. एक समान निवेश करके, आप बाज़ार गिरने पर ज़्यादा शेयर खरीदते हैं और बढ़ने पर कम. इससे समय के साथ आपकी खरीद लागत स्वाभाविक रूप से औसत हो जाती है.

एसआईपी में महंगाई निभा रही अहम भूमिका  

भले ही आपकी एसआईपी राशि बढ़ती रहे, महंगाई धीरे-धीरे खरीद शक्ति को कम करती जाती है. ऐसे में जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ती रहें, तो 10-12% रिटर्न देने वाला पोर्टफोलियो भी असाधारण नहीं लगेगा. यही वजह है कि. विशेषज्ञ वेतन बढ़ोतरी के साथ एसआईपी योगदान को धीरे-धीरे बढ़ाने, पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा करने और जोखिम कम बनाए रखने की सलाह देते हैं. कुमार बिनीत के अनुसार, एसआईपी की सफलता केवल समय पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि परिसंपत्ति आवंटन, निरंतरता, व्यय अनुपात, मूल्यांकन और निवेशक अनुशासन जैसे कई कारकों पर भी निर्भर करती है. 

धैर्य से होगा फायदा, घबराहट से नुकसान की आशंका  

एसआईपी को लेकर अलग अलग विशेषज्ञों की अपनी अलग राय  है. हाला कि एक बात स्पष्ट हो गई. 10 साल की एसआईपी रातोंरात अमीर बनने का शॉर्टकट नहीं है. यह हकीकत में बाजार के उतार चढ़ाव ब्याज को अपना काम करने का बेहतर मौका देती है. कुछ निवेशक अच्छी-खासी संपत्ति बना सकते हैं. वहीं, कुछ निवेशक खराब फंड चुनने, बीच में ही निवेश बंद करने या बाज़ार की मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य खोने पर निराश हो सकते हैं.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *