Persian Carpet Real Vs Fake: खरीदने जा रहे हैं पर्शियन कालीन, ऐसे करें असली-नकली की पहचान

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Tips To Buy Authentic Persian Carpet: अगर आप पर्शियन कालीन खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ उसकी खूबसूरती देखकर फैसला लेना भारी पड़ सकता है. ये कालीन अपनी बारीक कारीगरी, शानदार डिजाइन और शाही लुक के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. ऊन और रेशम जैसे प्राकृतिक धागों से हाथ से बुने गए ये कालीन सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि एक तरह की कला माने जाते हैं. भारत में भी मुगल काल से इनका चलन रहा है और आज दिल्ली, भदोही और मिर्जापुर जैसे बाजारों में ये आसानी से मिल जाते हैं. लेकिन बढ़ती डिमांड के साथ नकली कालीनों का खेल भी बढ़ गया है, जो असली के नाम पर ऊंचे दामों में बेचे जाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप खरीदने से पहले असली-नकली की पहचान करना सीख लें. 

किन बातों का रखें ध्यान?

सबसे आसान तरीका है कालीन के फ्रिंज यानी किनारों को ध्यान से देखना. असली पर्शियन कालीन में फ्रिंज अलग से नहीं लगाए जाते, बल्कि ये उसी धागे का हिस्सा होते हैं जिससे कालीन बुना जाता है. अगर आपको किनारे सिलकर या चिपकाकर लगाए गए दिखें, तो समझ लीजिए कि कालीन मशीन से बना है.

 बैक साइड देखना

दूसरा तरीका है कालीन को पलटकर उसकी बैक साइड देखना. क्योंकि असली कालीन हाथ से बुने जाते हैं, इसलिए उनकी पीछे की सतह पर हल्की-फुल्की असमानता और गांठें दिखाई देती हैं. यही छोटी-छोटी खामियां उसकी असलियत का सबूत होती हैं. वहीं मशीन से बने कालीन के पीछे का पैटर्न एकदम परफेक्ट और एक जैसा दिखेगा.

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मटेरियल  से भी कर सकते हैं पता

मटेरियल भी बहुत कुछ बता देता है. असली पर्शियन कालीन ऊन, रेशम या कॉटन जैसे प्राकृतिक धागों से बनते हैं, जो छूने में मुलायम, लचीले और हल्के गर्म महसूस होते हैं. इसके उलट नकली कालीन अक्सर नायलॉन या पॉलीप्रोपाइलीन जैसे सिंथेटिक मटेरियल से बनते हैं, जो ज्यादा चमकीले और प्लास्टिक जैसे लगते हैं.

डिजाइन और पैटर्न

डिजाइन और पैटर्न पर भी नजर डालना जरूरी है. हाथ से बने कालीन में डिजाइन पूरी तरह एक जैसा नहीं होता, उसमें हल्का फर्क नजर आता है. यही उसकी खासियत है. जबकि मशीन से बने कालीन में पैटर्न बिल्कुल एक जैसा और बिना किसी बदलाव के होता है. अगर आप पूरी तरह सुनिश्चित होना चाहते हैं, तो एक छोटा सा बर्न टेस्ट भी कर सकते हैं. किसी धागे को जलाने पर अगर बाल या ऊन जैसी गंध आए, तो वह प्राकृतिक है. लेकिन अगर धागा पिघलने लगे और प्लास्टिक जैसी स्मेल आए, तो वह नकली हो सकता है. हालांकि यह टेस्ट बहुत सावधानी से करना चाहिए.

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