Traditional Indian Homes Designs: बिना AC भी ठंडे रहते थे गांव के घर, जानें इनके डिजाइन की खासियत और मॉर्डन घरों के लिए जरूरी टिप्स

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Traditional Indian Homes Designs : आज के समय में गर्मी हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रही है. घरों के अंदर रहना भी मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर हमारी जरूरत बन चुके हैं. वहीं, एक समय ऐसा भी था जब बिना किसी मशीन या बिजली के सहारे घरों के अंदर ठंडक बनी रहती थी. हमारे पारंपरिक भारतीय घरों का डिजाइन इतना अलग होता था कि घर खुद ही नेचुरल तरीके से ठंडे रहते थे. पुराने समय के लोग जलवायु, हवा की दिशा, सूरज की रोशनी और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखकर घर बनाते थे.

यही वजह है कि उनके घर गर्मियों में भी आरामदायक रहते थे. आज जब बिजली की खपत बढ़ रही है और पर्यावरण पर दबाव भी बढ़ रहा है, तब इन पुराने तरीकों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि बिना AC के भी नेचुरली ठंडे रहने वाले पुराने भारतीय घर के डिजाइन की खासियत क्या है और मॉर्डन घरों के लिए जरूरी टिप्स क्या हैं. 

पुराने भारतीय घर के डिजाइन की खासियत क्या है

1.  दिशा और लेआउट का खास ध्यान – पुराने घरों को इस तरह बनाया जाता था कि सूरज की तेज धूप सीधे अंदर न आए. खिड़कियां और दरवाजे हवा की दिशा को ध्यान में रखकर लगाए जाते थे जिससे घर में क्रॉस वेंटिलेशन बना रहे. इससे घर के अंदर ताजी हवा लगातार आती-जाती रहती थी और गर्म हवा बाहर निकल जाती थी. इससे घर का तापमान नेचुरल  रूप से संतुलित रहता था. 

2. नेचुरल और स्थानीय सामग्री का यूज – पहले के घरों में मिट्टी, पत्थर, चूना और टाइल वाली छत जैसी चीजों का इस्तेमाल होता था. ये सामग्री गर्मी को जल्दी अंदर नहीं आने देती थीं. मोटी दीवारें दिन में गर्मी को रोकती थीं और रात में धीरे-धीरे बाहर छोड़ती थी. इससे घर दिन में ठंडा और रात में ज्यादा गर्म नहीं होता था. साथ ही, स्थानीय सामग्री का यूज होने से ये घर पर्यावरण के अनुकूल भी होते थे. 

3. आंगन का महत्व – पुराने भारतीय घरों में आंगन एक बहुत अहम हिस्सा होता था. यह खुला स्थान घर के बीच में होता था, जहां से हवा का फ्लो बेहतर होता था. गर्म हवा ऊपर उठकर बाहर निकल जाती थी और ठंडी हवा अंदर आती थी. कई बार आंगन में पेड़-पौधे या पानी का छोटा स्रोत भी होता था, जो ठंडक को और बढ़ा देता था.

4. छाया और ठंडक देने वाले डिजाइन –  बरामदा, जालीदार खिड़कियां और ढलान वाली छतें घर को सीधी धूप से बचाती थीं.  जालियां हवा को अंदर आने देती थीं लेकिन धूप को कम कर देती थीं. बरामदे छाया देते थे और घर के अंदर तापमान को संतुलित रखते थे. ये सभी डिजाइन न सिर्फ यूजफुल थे बल्कि देखने में भी सुंदर होते थे. 

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मॉर्डन घरों के लिए जरूरी टिप्स क्या हैं

1. आज के आर्किटेक्चर में पारंपरिक तरीकों को अपनाना बहुत फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए घर में सही वेंटिलेशन रखना जरूरी है. जिससे ताजी हवा अंदर आती रहे और गर्म हवा बाहर निकल सके, जिससे अंदर का तापमान प्राकृतिक रूप से ठंडा बना रहता है.

2. घर की दिशा इस तरह तय करनी चाहिए कि सीधी धूप कम आए और हवा का फ्लो अच्छा बना रहे. 

3. मिट्टी, पत्थर और चूने जैसी नेचुरल सामग्री का यूज करने से घर में गर्मी कम प्रवेश करती है और तापमान संतुलित रहता है.

4.  घर में छाया वाले हिस्से जैसे बरामदा या जालीदार खिड़कियां शामिल करने से धूप का असर कम होता है और ठंडक बनी रहती है.

5. खुली जगह और हरियाली जैसे आंगन, पेड़-पौधे या छोटे बगीचे घर के वातावरण को ठंडा और ताजा बनाते हैं, जिससे कम एनर्जी में ज्यादा आराम मिल पाता है. 

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