
जब कोई रिश्ता लंबे समय तक चलता है, तो धीरे-धीरे हम अपनी पहचान का एक हिस्सा अपने पार्टनर के साथ जोड़ लेते हैं. हम, मैं और वो से बदलकर हम बन जाते हैं. ऐसे में रिश्ता खत्म करना सिर्फ एक इंसान को खोना नहीं होता, बल्कि ऐसा लगता है जैसे हम अपने ही पर्सनेलिटी का एक हिस्सा खो रहे हैं. यही वजह है कि यह फैसला बहुत भारी लगने लगता है.