Hormuz संकट के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों ने फिर पकड़ी रफ्तार, भारत में 17 फीसदी कम रहा इंपोर्ट

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  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया।
  • भारत के कच्चे तेल के आयात में लगभग 17% की कमी आई।
  • ईरान और अमेरिका के बीच टकराव से महंगाई बढ़ने का खतरा।
  • अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज पर कार्रवाई की।

Crude Oil Price Today: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार पर साफ नजर आ रहा है. होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं. जिससे टकराव की आशंका भी बढ़ी है. इस खबर का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा.

आज, सोमवार 20 अप्रैल को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है. साथ ही देश में 17 फीसदी इंपोर्ट में कमी आई हैं. आइए जानते हैं, इस बारे में.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

वैश्विक तेल बाजार पर मिडिल ईस्ट तनाव का असर साफ दिख रहा हैं. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स में करीब 6 प्रतिशत की बढ़त के साथ कीमत 88.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई.

वहीं ब्रेंट क्रूड के जून डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट में भी लगभग 5.63 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. जिसके बाद इसका ताजा भाव 95.48 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े पर पहुंच गया है.

कच्चे तेल के आयात में आई गिरावट

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत के तेल आयात पर भी साफ दिखाई दे रहा हैं. मौजूदा हालात के चलते देश में कच्चे तेल की खरीदारी में कमी आई है. जिससे सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत का कच्चे तेल का आयात पिछले साल की तुलना में करीब 17 फीसदी घट गया है. जिससे इस एरिया में बढ़ते संकट का साफ पता चलता है. 

महंगाई बढ़ने का खतरा

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर पेट्रोल और डीजल के दाम पर भी पड़ सकता है. अगर ईंधन महंगा होता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों के खर्च पर दिखता हैं. ट्रांसपोर्टिंग महंगा होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं. जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका रहती है.

खाड़ी में बढ़ा टकराव

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और तेज हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी कंटेनर जहाज पर कार्रवाई की. जिसके बाद मरीन बलों ने उसे अपने कब्जे में ले लिया. ऐसा कहा जा रहा है कि, यह जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था.

इसी के साथ ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा हैं कि अगर समझौता नहीं हुआ तो उसके अहम ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता हैं.

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