How To Reach Baisaran Valley From Delhi And Cost: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था. उसके बाद लगातार पहलगाम जाने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखने को मिली थी. हालांकि अब पर्यटकों की संख्या में धीरे- धीरे इजाफा देखने को मिल रहा है. लेकिन, बैसरन घाटी अभी भी सुरक्षा कारणों से बंद है. अगर आप दिल्ली से बैसरन घाटी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले यह समझ लेना जरूरी है कि यह जगह सीधे नहीं, बल्कि एक खूबसूरत सफर के बाद पहुंची जाती है. कश्मीर के पहलगाम के पास स्थित यह घाटी अपने हरे-भरे मैदान और चारों तरफ देवदार के जंगलों के लिए जानी जाती है. चलिए आपको बताते हैं कि आप इस खूबसूरत घाटी तक कैसे पहुंच सकते हैं?
दिल्ली से कैसे पहुंच सकते हैं?
दिल्ली से यहां पहुंचने का सबसे आसान तरीका हवाई यात्रा है. दिल्ली से श्रीनगर की फ्लाइट करीब 45 से 50 मिनट में पहुंचा देती है. दिल्ली से श्रीनगर फ्लाइट के लिए आपको 3 हजार से 5 हजार रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. वहां से पहलगाम तक सड़क मार्ग से करीब ढाई से साढ़े तीन घंटे का सफर तय करना पड़ता है. श्रीनगर एयरपोर्ट से पहलगाम जाने के लिए टैक्सी सबसे सुविधाजनक रहती है. निजी टैक्सी का किराया आमतौर पर 3000 से 4000 रुपये के बीच पड़ता है, जबकि शेयरिंग गाड़ी में यह खर्च थोड़ा कम हो सकता है.
ट्रेन सस्ता विकल्प
अगर आप बजट में यात्रा करना चाहते हैं, तो सार्वजनिक परिवहन भी एक विकल्प है. इसके लिए पहले जम्मू तक ट्रेन से जाएं, फिर वहां से बस या साझा गाड़ी के जरिए श्रीनगर या अनंतनाग पहुंचें और अंत में पहलगाम तक दूसरी गाड़ी लें. हालांकि इस तरीके में समय ज्यादा लगता है.
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पहलगाम से बैसरन घाटी
पहलगाम पहुंचने के बाद बैसरन घाटी तक कोई गाड़ी नहीं जाती. यहां तक पहुंचने के लिए या तो आपको पैदल चढ़ाई करनी होगी या फिर टट्टू का सहारा लेना होगा। यह दूरी करीब 4 से 5 किलोमीटर की होती है और रास्ता बेहद खूबसूरत जंगलों से होकर गुजरता है. 2026 तक पहलगाम से बैसरन तक टट्टू की सवारी का किराया 1320 रुपये प्रति व्यक्ति है, जो मौसम और भीड़ के अनुसार बदल सकता है अगर आप गाइड लेते हैं, तो उसका अलग से खर्च आ सकता है.
मिनी स्विट्जरलैंड
बैसरन घाटी को कश्मीर का मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है. यह इलाका अपनी हरी घास के मैदानों, ऊंचे देवदार के पेड़ों और बर्फ से ढंकी पहाड़ियों के नजारों के लिए मशहूर है. यहां की शांति और खुला प्राकृतिक दृश्य इसे परिवार और नेचर लवर्स के लिए खास बनाता है. घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून माना जाता है, जब पूरी घाटी हरे कालीन की तरह दिखती है और मौसम सुहावना रहता है. जुलाई से सितंबर के बीच भी जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान बारिश होती है.