Jammu-Kashmir Pahalgam Baisaran Valley Tourism : क्या अब बैसरन घाटी नहीं जा सकते टूरिस्ट, जानें पहलगाम हमले के एक साल बाद कैसे हैं हालात?

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Jammu-Kashmir Pahalgam Baisaran Valley Tourism : कश्मीर के पहलगाम में स्थित बैसरन घाटी को लोग मिनी स्विट्जरलैंड भी कहते हैं क्योंकि यहां हरे-भरे मैदान, ऊंचे देवदार के पेड़ और शांत वातावरण देखने को मिलता है, लेकिन 22 अप्रैल 2025 को यहां हुए आतंकी हमले ने इस खूबसूरत जगह की शांति और पर्यटन को बहुत नुकसान पहुंचाया. इस हमले में कई बेगुनाह लोगों की जान चली गई और पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया, जिसके बाद बैसरन घाटी और आसपास के कई पर्यटन स्थल बंद कर दिए गए.

अब एक साल बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. पर्यटन धीरे-धीरे वापस आ रहा है, लेकिन बैसरन और उसके आसपास के कई इलाके अभी भी पर्यटकों के लिए खुले नहीं हैं. यहां तक पहुंचने के लिए जो टट्टू के रास्ते इस्तेमाल होते थे, वे भी काफी समय से बंद हैं, जिससे सैकड़ों टट्टू चालकों की कमाई लगभग खत्म हो गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या टूरिस्ट अब बैसरन घाटी नहीं जा सकते हैं और पहलगाम हमले के एक साल बाद कैसे हालात हैं.

क्या टूरिस्ट अब बैसरन घाटी नहीं जा सकते हैं

हमले के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों से बैसरन घाटी और आसपास के कई पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया गया. यह फैसला पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था. वहीं अब एक साल बाद भी बैसरन घाटी पूरी तरह से पर्यटकों के लिए खुली नहीं है. कुछ हिस्सों तक जाने की अनुमति है, लेकिन आगे सुरक्षा बलों के बैरियर लगाए गए हैं. पर्यटक घाटी का पूरा अनुभव नहीं ले पा रहे हैं. इससे कई लोग निराश होकर लौट जाते हैं. 

पहलगाम हमले के एक साल बाद कैसे हालात हैं?

इस इलाके के हजारों परिवार पर्यटन पर निर्भर हैं. टट्टू वाले, टैक्सी ड्राइवर, दुकानदार सभी की लाइफ पर असर पड़ा है. कई लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही घाटी पूरी तरह नहीं खुली, तो उनका गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा. कुछ टट्टू वालों ने तो अपने घोड़े बेचने तक की बात कही है, क्योंकि उनके लिए चारा जुटाना भी मूश्किल हो गया है. बैसरन घाटी के बंद होने से सिर्फ टट्टू वालों को ही नहीं, बल्कि पूरे पर्यटन उद्योग को नुकसान हुआ. होटल मालिकों का कहना है कि अब उनके यहां सिर्फ 30 प्रतिशत तक ही कमरे भर पा रहे हैं. पहले जहां पर्यटक कई दिन रुकते थे, अब वे सिर्फ 1-2 दिन में ही लौट जाते हैं. वह सिर्फ पास के कुछ खुले इलाकों जैसे बेताब वैली या अरु वैली तक ही सीमित रह जाते हैं. 

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सरकार की तैयारी और नई योजना

सरकार अब हालात को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है. सुरक्षा बढ़ाई गई है और इलाके का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है. इसके अलावा, बैसरन घाटी तक एक नई सड़क बनाने की योजना भी है, जिससे वहां पहुंचना आसान होगा और आपात स्थिति में मदद जल्दी पहुंच सकेगी, हालांकि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं, लेकिन धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है. कुछ पर्यटन स्थल दोबारा खोले जा चुके हैं और पर्यटकों की संख्या भी बढ़ने लगी है. स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही बैसरन घाटी भी पूरी तरह खुल जाएगी. 

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