देश में खाली हो रहे तेल के कुएं? उत्पादन में पिछड़ा भारत, 11वें साल दर्ज हुई गिरावट, मुश्किलें बढ़ीं

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  • भारत में कच्चे तेल और गैस उत्पादन लगातार घट रहा है।
  • पुराने तेल क्षेत्रों का खत्म होना, नए भंडार न मिलना कारण।
  • आयात पर निर्भरता बढ़ी: कच्चा तेल 89%, गैस 51%।
  • ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए खोज, विकास और निवेश आवश्यक।

India’s Crude oil Production Falls: भारत में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन में लगातार गिरावट अब बड़ी चिंता बन गई है. 2025-26 में कच्चे तेल का उत्पादन लगातार 11वें साल घटा है, जबकि गैस उत्पादन भी दूसरे साल कम हुआ. अगर इसके कारण की बात करें तो पुराने तेल क्षेत्रों का खत्म होना और नए बड़े भंडार न मिलना है. इसी कारण भारत की आयात पर निर्भरता बढ़कर कच्चे तेल में 89 प्रतिशत और गैस में 51 प्रतिशत हो गई है. इसी बीच मिडिल ईस्ट तनाव जैसी घटनाओं ने हालात और मुश्किल बना दिए है, जिससे तेल महंगा भी हुआ है और कमी भी देखने को साफ तौर पर मिल रही है.

कच्चा तेल 22 प्रतिशत तक कम हुआ

पिछले कुछ सालों में सरकार ने कई ऐसे सुधार लागू किए हैं जिनका उद्देश्य तेल की खोज (एक्सप्लोरेशन) से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जैसे डेटा रिपॉजिटरी बनाना और नियम आसान करना, लेकिन बड़ी विदेशी कंपनियां अब भी कम रुचि दिखा रही हैं. पिछले 10 सालों में उत्पादन लगातार घटा है. कच्चा तेल 22 प्रतिशत तक कम हुआ है. 

उत्पादन में गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?

पुराने तेल क्षेत्रों का खत्म होना

टाइम के साथ पुराने भंडार खाली होते जा रहे हैं, जिससे उत्पादन स्वाभाविक रूप से घट रहा है.

नई बड़ी खोजों का अभाव

पिछले एक दशक में कोई बड़ा तेल या गैस भंडार नहीं मिला है, जिससे उत्पादन बढ़ नहीं पाया.

कमर्शियलाइजेशन में देरी

जिन संसाधनों की पहचान हो चुकी है, उनका तेजी से विकास नहीं हो पाया है.

उत्पादन से जुड़े आंकड़े

कच्चा तेल
2025–26 में उत्पादन 2.5 प्रतिशत गिरकर 28 मिलियन मीट्रिक टन पुहंचा और वहीं 2014–15 से अब तक कुल 22 प्रतिशत गिरावट देखी गई.

प्राकृतिक गैस
2025–26 में 3.7 प्रतिशत गिरकर 34,776 mmscm
2011–12 से 2020–21 तक लगभग 40 प्रतिशत गिरावट
2021–22 में कुछ सुधार, लेकिन अब उत्पादन स्थिर

ऊर्जा क्षेत्र में भारत को बनना चाहिए आत्मनिर्भर

इन सबसे यह समझ आता है कि अब भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेजी से खोज, विकास और इन्वेस्टमेंट बढ़ाने की बेहज जरूरत है, क्योंकि आयात पर बढ़ती निर्भरता फ्यूचर में और बड़ी चुनौती बन सकती है.



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