Trump White House Shooting: अमेरिका में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी की घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. कार्यक्रम के बीच अचानक फायरिंग की आवाज सुनाई दी, जिससे अफरा-तफरी मच गई. मौके पर मौजूद लोगों को तुरंत झुकने के लिए कहा गया और सुरक्षित जगह लेने के निर्देश दिए गए. जबकि सुरक्षा एजेंसी भी एक्टिव हो गई. इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी और अन्य बड़े नेता भी कार्यक्रम में मौजूद थे, लेकिन सभी सुरक्षित है.
खुद ट्रंप ने बाद में बताया कि फायरिंग होते ही यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस ने बहुत तेजी से कार्रवाई की, जिससे बड़ा हादसा टल गया. हालांकि एक सुरक्षाकर्मी घायल हुआ है, लेकिन बुलेट प्रूफ सुरक्षा के कारण उसकी जान बच गई. वहीं हमलावरों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगी सीक्रेट सर्विस कितनी ताकतवर हैं और इसमें लोग कैसे चुने जाते हैं.
मल्टी लेयर सुरक्षा में रहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा कई स्तरों में होती है, जिसे मल्टी लेयर सिक्योरिटी कहा जाता है. इसमें सैकड़ों ट्रेंड एजेंट, काउंटर स्नाइपर टीमें और खुफिया एजेंसी शामिल रहती है. एजेंट राष्ट्रपति के हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं और खतरे का अंदाजा पहले से ही लगाने की कोशिश करते हैं. किसी भी बड़े कार्यक्रम से पहले पूरी जगह की जांच की जाती है, सुरक्षा प्लान तैयार होता है और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम किया जाता है. यही वजह है की गंभीर हालत में भी नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
क्या है सीक्रेट सर्विस और कैसे करती है काम
यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस अमेरिका की खास एजेंसी है, जो सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि उपराष्ट्रपति और उनके परिवार, पूर्व राष्ट्रपति और विदेश से आने वाले बड़े नेताओं की सुरक्षा करती है. इनके दो मुख्य काम होते हैं एक वीआईपी सुरक्षा और दूसरी आर्थिक और साइबर अपराधों की जांच. यह एजेंसी बैंक फ्रॉड, नकली नोट, ऑनलाइन ठगी की पहचान, चोरी और हैकिंग जैसे मामलों की भी जांच करती है. शुरुआत में इसका गठन 1865 में नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए किया गया था, लेकिन बाद में इसकी जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई और राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी इसे सौंप दी गई.
कैसे काम करते हैं एजेंट
सीक्रेट सर्विस के एजेंट बहुत कठिन ट्रेनिंग से गुजरते हैं, उन्हें भीड़ में सुरक्षा देना, खतरों की पहचान करना, हथियार चलाना और साइबर अपराध पकड़ने जैसी ट्रेनिंग दी जाती है. अक्सर यह एजेंट सामान्य कपड़ों में रहते हैं, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके. उनके पास आधुनिक हथियार, बैलिस्टिक जैकेट, इंक्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम और इमरजेंसी मेडिकल किट होती है. हर एजेंट हर समय अलर्ट मोड में रहता है और सेकंड़ो में फैसला लेने के लिए तैयार रहता है.
कैसे चुने जाते हैं सीक्रेट एजेंट
सीक्रेट एजेंट की भर्ती होना आसान नहीं होता है. इसकी चयन प्रक्रिया बहुत कठिन और कई स्तरों वाली होती है. इसमें फिजिकल क्षमता, मानसिक मजबूती, बैकग्राउंड चेक और स्पेशल ट्रेनिंग शामिल होती है. बहुत कम लोग इस प्रक्रिया को पार कर पाते हैं. एजेंट्स को न सिर्फ सुरक्षा बल्कि जांच से जुड़े मामलों में भी दक्ष होना पड़ता है. इसलिए उन्हें लगातार अपडेट और प्रशिक्षित किया जाता है.
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