अब OPEC का हिस्सा नहीं रहेगा UAE, जानें भारत पर इस फैसले का असर: क्या फिर से बढ़ेगी तेल की कीमत?

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UAE’s exit from OPEC: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) छोड़ने का ऐलान कर दिया है. इसके चलते ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 3-हफ्ते के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं.

यह कदम 1 मई से प्रभावी होगा. UAE ने यह फैसला एक ऐसे वक्त पर लिया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग के चलते वैश्विक तेल बाजारों में पहले से अस्थिरता का माहौल है. 

कितनी बढ़ गई तेल की कीमतें?

आज WTI क्रूड 100.36 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया है. वहीं, ब्रेंट क्रूड भी कीमतों में 1.25 परसेंट से अधिक की तेजी के साथ 104.95 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंची है. 

UAE के फैसले से अमेरिका को फायदा

ईरान में जंग और इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से पहले से ही सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित है, जिससे बीते दिनों तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं. अब OPEC का साथ छोड़ने के इस फैसले से कीमतों पर और दबाव बढ़ने की संभावना है.

कतर और अंगोला के बाद अब UAE का OPEC से बाहर निकलना यह दिखाता है कि अब बड़े तेल उत्पादक देश अपनी प्रोडक्शन लिमिट खुद तय करना चाहते हैं ताकि भविष्य में कीमतों में और अधिक स्थिरता लाई जा सके.

इधर, एक्सपर्ट्स का मानना है कि UAE के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अप्रत्याशित भू-राजनीतिक फायदा मिलेगा. अमेरिका लंबे समय से OPEC को एक ‘कार्टेल’ मानता है, जो तेल की कीमतों को अपने हिसाब से बढ़ाती है. UAE जैसे बड़े उत्पादक देशों के निकलने से संगठन की बाजार पर पकड़ कमजोर होगी, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट को नया आकार में अमेरिका की स्थिति मजबूत होगी.

क्या मजबूत होगी ट्रंप की पॉलिसी? 

चूंकि, ईरान में तनाव के चलते खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई में रुकावट आई है. ऐसे में अपनी जरूरतें पूरा करने के लिए दुनिया भर के देश अमेरिकी शेल कंपनियों का रूख कर रहे हैं. इससे अमेरिकी एक्सपोटर्स को फायदा हो रहा है.

इधर, UAE का अमेरिका के साथ अच्छे संबंध है. ऐसे में हो सकता है कि OPEC से बाहर निकलकर UAE सऊदी अरब के बजाय अमेरिका की रणनीतियों के करीब आ जाए. यह ट्रंप की एनर्जी पॉलिसी के मुताबिक है क्योंकि ट्रंप चाहते हैं कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स में OPEC का एकाधिकार खत्म हो. 

OPEC क्या है? 

ओपेक दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक शक्तिशाली गुट है, जिसकी स्थापना 1960 में बगदाद में हुई. इसका काम ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखना और सप्लाई को मैनेज करना है. OPEC यह सुनिश्चित करता है कि तेल उत्पादक देशों को उनके तेल का सही दाम मिले. इसका हेडक्वॉर्टर विएना, ऑस्ट्रिया में है. UAE के बाद अब OPEC में मुख्य रूप से सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत, वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं. 

UAE के फैसले का भारत पर असर? 

भारत के लिए यह स्थिति किसी चुनौती से कम नहीं, जो तेल के आयात पर काफी निर्भर है. 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ दोनों से UAE के बाहर होने के फैसले से ग्लोबल ऑयल मार्केट में भूचाल आ गया है. इससे कीमतें भी 100 डॉलर के पार चली गई हैं. अब जाहिर सी बात है कि आयात महंगा होगा, जो देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे कई जरूरी चीजों के भी दाम बढ़ जाएंगे.

तेल की कीमतें बढ़ने पर सरकार को भी सब्सिडी देनी पड़ती सकती है या एक्साइज ड्यूटी कम करना पड़ सकता है. इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, जिससे दूसरे विकास कार्यों के लिए खर्च में कमी आ सकती है.

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