कौन थे भारत के सबसे पहले CJI? जानें कितनी मिलती थी सैलरी

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  • जस्टिस एच. जे. कानिया भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश बने.
  • उन्होंने 1915 में बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत शुरू की.
  • 1946 में फेडरल कोर्ट ऑफ इंडिया के जज नियुक्त हुए.
  • पद पर रहते हुए निधन होने वाले वे पहले सीजेआई थे.

आजादी के बाद जब देश ने अपना संविधान अपनाया और 26 जनवरी 1950 को सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई, तब न्याय के एक नए दौर की शुरुआत हुई. इसी ऐतिहासिक दिन भारत को मिले उसके पहले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एच जे कनिया.

जस्टिस कानिया का जन्म 3 नवंबर 1890 को गुजरात के सूरत में एक विद्वान परिवार में हुआ. पढ़ाई में तेज कानिया ने भावनगर के समालदास कॉलेज से बी.ए. किया और फिर बॉम्बे के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे न्याय के क्षेत्र में अपना नाम बनाएंगे.

साल 1915 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत शुरू की. मेहनत, सादगी और कानून की गहरी समझ ने उन्हें जल्द पहचान दिलाई. 1930 में वे बॉम्बे हाई कोर्ट में एक्टिंग जज बने, 1931 में एडिशनल जज और 1933 में स्थायी जज नियुक्त हुए. 1944 और 1945 में वे एक्टिंग चीफ जस्टिस भी रहे. यह दौर उनके अनुभव और नेतृत्व का प्रमाण था.

कब ली शपथ?

1946 में जस्टिस कानिया को फेडरल कोर्ट ऑफ इंडिया का जज बनाया गया. यही फेडरल कोर्ट आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट की नींव बना. 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को सुप्रीम कोर्ट अस्तित्व में आया. इसी दिन जस्टिस एच जे कानिया ने भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली.

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कितनी होती थी सैलरी

रिपोर्ट्स के अनुसार 1950 में जब सुप्रीम कोर्ट बना, तब पहले CJI की सैलरी 5,000 प्रति माह तय की गई थी. उस दौर में यह रकम बहुत सम्मानजनक मानी जाती थी, लेकिन पद की गरिमा के सामने यह सादगी का प्रतीक भी थी. जस्टिस कानिया अपने शांत स्वभाव, सादगी और न्यायप्रियता के लिए जाने जाते थे.

कब तक चला कार्यकाल?
उनका कार्यकाल 26 जनवरी 1950 से 6 नवंबर 1951 तक रहा. वे अपने पद पर रहते हुए ही इस दुनिया से विदा हो गए. इस तरह वे देश के पहले CJI ही नहीं, बल्कि पद पर रहते हुए निधन होने वाले भी पहले CJI बने. जस्टिस कानिया ने सुप्रीम कोर्ट के शुरुआती वर्षों में जो परंपराएं शुरू कीं, वही आगे चलकर भारतीय न्याय व्यवस्था की पहचान बनीं. अदालत की कार्यप्रणाली, अनुशासन और संविधान के प्रति सम्मान की मजबूत नींव उनके समय में रखी गई.

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