क्या छुट्टी वाले दिन भी बॉस थमा देते हैं काम? जानें अपना हक, क्या कहता है कानून?

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New labour law rules: इंसान हफ्ता भर मेहनत-मजदूरी करता है और अपने वीकली ऑफ वाले दिन आराम करता है ताकि फिर से शुरू हो रहे नए हफ्ते के लिए खुद को रीचार्ज कर सके. इसके अलावा, अपने कुछ निजी काम भी वह इस वीक ऑफ दिन ही निपटाता है.

हालांकि, कई बार ऑफिस से बॉस का कॉल आ जाने की वजह से एम्प्लाई परेशानी में पड़ जाता है. कई बार बॉस छुट्टी वाले दिन बॉस कॉल कर कोई पुराना या रुका हुआ काम आपको थमा देते हैं, जो आपको हर हाल में पूरा करना होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बारे में कानून क्या कहता है? क्या ऐसा करना सही है या गलत? आइए आज हम आपको इस पर डिटेल में बताते हैं. 

प्राइवेट कंपनियों में डेडलाइन का प्रेशर

NM Law Chambers के फाउंडिंग पार्टनर मलक भट्ट ने ET Wealth Online से बात करते हुए कहा, ”आमतौर पर कई भारतीय प्राइवेट कंपनियों में, खासकर उन कंपनियों में जिन पर परफॉर्म करने का दबाव होता है, उनके लिए यह काफी आम बात है कि मैनेजर कर्मचारियों को उनके छुट्टी के दिनों में भी फोन करते हैं, ‘प्रोजेक्ट की डेडलाइन’ का हवाला देकर पहले से मंजूर की गई छुट्टियां कैंसिल कर देते हैं या उनसे उम्मीद करते हैं कि वे छुट्टियों के दौरान भी उपलब्ध रहें.” एम्प्लाई नौकरी जाने के डर से चुपचाप अपना काम निपटाने में लग जाता है. 

क्या कहता है कानून?

भारत का नया लेबर कोड (2025-26) के तहत, कर्मचारियों की सहमति के बिना छुट्टी के दिन उन्हें काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. ऐसा किए जाने पर मुआवजे के रूप में दोगुना वेतन या बदले में छुट्टी (Compensatory Off) देना अनिवार्य है.

इसके अलावा, 15-30 मिनट से अधिक अतिरिक्त काम अब ओवरटाइम माना जाएगा. इसके लिए दोगुना भुगतान करने का भी प्रावधान है. जी बिजनेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर सात दिन में कम से कम एक दिन छुट्टी अनिवार्य है और राइट-टू-डिस्कनेक्ट बिल के तहत काम के घंटों के बाद कॉल या मैसेज को इग्नोर करने का भी प्रस्ताव है.  

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