जोधपुर में पढ़ाई का नया दौर, 70 हजार कॉपियां; 1000 स्कूल और AI ने सेकंडों में बना दिए रिपोर्ट कार्ड

2e6d2f17edd2680e6f8d35c191bfe9c817775373322931294 original


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • जोधपुर में AI की मदद से कुछ सेकंड में छात्रों की कॉपियां जांची गईं.
  • AI ऐप से 70,000 से अधिक छात्रों का हुआ विषयवार मूल्यांकन.
  • शिक्षक अब कमजोर टॉपिक्स पर केंद्रित सुधार कर सकेंगे.
  • यह पहल सीखने की कमियों को दूर कर जवाबदेही बढ़ाएगी.

जोधपुर से शिक्षा की एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आने वाले समय में स्कूलों की तस्वीर बदल सकती है. यहां अब कॉपियां जांचने में हफ्ते नहीं लगते, बल्कि कुछ ही सेकंड में हर छात्र का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो जाता है. यह संभव हुआ है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से. जिले के 1000 से ज्यादा स्कूलों में 6वीं से 9वीं तक के 70,000 से अधिक छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं AI ऐप से जांची गईं और हर बच्चे का विषयवार, साफ और बिना पक्षपात वाला मूल्यांकन तैयार हुआ.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला कक्षा 8 का छात्र जीवराज सिंह इसका एक उदाहरण है. उसकी रिपोर्ट बताती है कि वह सांख्यिकी समझने में ‘बेहतर’ है, प्राचीन सभ्यताओं और संविधान के अधिकार कर्तव्य पर उसकी पकड़ मजबूत है. वहीं कहानियों और कविताओं की समझ ‘सुधर रही’ श्रेणी में है. गणित में नंबर नियम और विज्ञान में प्राकृतिक संसाधनों की समझ भी ‘सुधर रही’ है.

कैसे काम करता है यह AI सिस्टम

अब शिक्षक कॉपियों को AI ऐप से स्कैन करते हैं. स्कैन होते ही ऐप उत्तर पढ़कर अंक देता है और विषयवार विश्लेषण भी तैयार कर देता है. पहले जहां एक कॉपी जांचने में 5–7 मिनट लगते थे, अब वही काम सेकंडों में हो रहा है. खास बात यह है कि यह सिस्टम केवल MCQ सवाल नहीं, बल्कि लिखित उत्तरों का भी विश्लेषण कर रहा है. देश में पहली बार इस स्तर पर सब्जेक्टिव उत्तरों की AI से जांच की गई है.

इस पहल के तहत अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान इन पांच विषयों में 3 लाख से अधिक आकलन तैयार हुए. पहले जहां इस तरह की रिपोर्ट बनाने में हफ्तों लग जाते थे, अब तीन दिन में छात्रों, शिक्षकों, प्राचार्यों और स्कूलों के लिए अलग-अलग विश्लेषण रिपोर्ट तैयार हो गई.

शिक्षकों के लिए बड़ी मदद

AI रिपोर्ट में हर विषय के दर्जनों टॉपिक 0 से 10 के पैमाने पर दिखते हैं. जहां अंक कम हैं, वहां ‘तुरंत सुधार’ की जरूरत बताई जाती है. जहां अंक ज्यादा हैं, वहां स्थिति अच्छी मानी जाती है. इससे शिक्षक सीधे उन टॉपिक पर काम कर सकते हैं, जहां बच्चे पीछे हैं. इसे ‘टारगेटेड सुधार’ कहा जा रहा है.

यह भी पढ़ें – CUET UG 2026 परीक्षा के लिए परीक्षा सिटी स्लिप जारी, एडमिट कार्ड जल्द ही जारी होगा

एक जैसी जांच, बिना पक्षपात

जिला शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि पहले अलग-अलग स्कूलों में अलग तरीके से मूल्यांकन होता था. इससे समानता नहीं रहती थी. अब AI के जरिए एक जैसा और बिना गलती का मूल्यांकन हो रहा है. इससे सीखने की कमियां साफ दिखती हैं और पूरे सिस्टम में जवाबदेही बढ़ती है.

पहले चरण से मिली सफलता

अक्टूबर 2025 में पहले चरण में 54 सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में 3000 से अधिक छात्रों पर यह प्रयोग किया गया था. वहां मिली सफलता के बाद इसे पूरे जिले में लागू किया गया. अब 15 ब्लॉकों के शिक्षकों और प्राचार्यों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे इस सिस्टम को अच्छे से समझकर इस्तेमाल कर सकें.
किसने शुरू की यह पहल

इस परियोजना की शुरुआत पिछले साल तत्कालीन जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने की थी. अब इसे जिला कलेक्टर आलोक रंजन, जिला परिषद के सीईओ, शिक्षा विभाग, DIET, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, स्कूलों और हजारों शिक्षकों के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है.

यह भी पढ़ें – डांस सीखना हो या जिम जाना, अब साथ होंगी महिला प्रशिक्षक; यूपी में बदलेंगे नियम

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *