- डांस क्लास, जिम, योगा सेंटर में महिला शिक्षक अनिवार्य.
- बुटीक, कपड़ों की दुकानों में महिला कर्मचारी आवश्यक.
- स्कूल बसों में महिला सुरक्षाकर्मी या शिक्षक होंगे.
- जिम, योगा सेंटर में पहचान पत्र जमा करना होगा.
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब डांस क्लास, जिम, योगा सेंटर, बुटीक और कई अन्य जगहों पर नए नियम लागू किए जा रहे हैं. महिला आयोग ने एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए कुल 9 अहम निर्देश जारी किए हैं, जिनका मकसद महिलाओं के लिए माहौल को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है.
नए निर्देशों के मुताबिक अब लड़कियों को डांस सिखाने के लिए महिला शिक्षक (फीमेल टीचर) रखना जरूरी होगा. महिला आयोग का मानना है कि इससे छात्राओं को ज्यादा सुरक्षित और सहज माहौल मिलेगा.
जिम, योगा और बुटीक में भी महिला स्टाफ जरूरी
नए नियमों के तहत अब जिम, योगा सेंटर और नाट्य कला केंद्रों में भी महिला ट्रेनर और शिक्षक की मौजूदगी जरूरी होगी. इसके साथ ही ट्रेनर की पूरी तरह से जांच (वेरिफिकेशन) भी कराई जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके. इसके अलावा बुटीक और कपड़ों की दुकानों में जहां महिलाओं के कपड़े बनाए या नाप लिए जाते हैं, वहां भी महिला कर्मचारी रखना आवश्यक किया गया है.
स्कूल बसों में महिला स्टाफ जरूरी
नए आदेशों में स्कूलों के लिए भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब स्कूल बसों में महिला सुरक्षाकर्मी या महिला शिक्षक का होना जरूरी है. इसका मकसद बच्चों, खासकर लड़कियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाना है.
एंट्री पर पहचान पत्र जरूरी
जिम और योगा सेंटर में आने वाले हर व्यक्ति के लिए अब आधार कार्ड या पहचान पत्र की कॉपी देना जरूरी होगा. इससे वहां आने-जाने वाले लोगों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर रोक लग सकेगी.
सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
महिला आयोग ने साफ कहा है कि सभी कोचिंग सेंटर, जिम, योगा क्लास और बुटीक में सीसीटीवी कैमरे और डीवीआर सिस्टम लगाना जरूरी होगा. इससे किसी भी घटना की निगरानी की जा सकेगी और सुरक्षा मजबूत होगी.
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महिला आयोग का क्या कहना है?
महिला आयोग ने यह 9 सूत्रीय निर्देश मुख्य सचिव को लागू करने के लिए भेजे हैं. आयोग का कहना है कि यह कदम महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए जरूरी है. खासकर उन जगहों पर जहां महिलाएं प्रशिक्षण या काम के लिए जाती हैं.
याचिका के बाद आया फैसला
यह पूरा मामला वकील प्रवीण फाइटर की याचिका के बाद सामने आया. सुनवाई के दौरान महिला आयोग ने सभी पहलुओं पर विचार किया और फिर ये निर्देश जारी किए. आयोग का मानना है कि सार्वजनिक और निजी प्रशिक्षण संस्थानों में सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नियम होने चाहिए.
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