Odisha Bank Case: हाल ही में ओडिशा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया. एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने कंधे पर एक कंकाल लेकर बैंक जाता हुआ दिखा. ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. वीडियो वायरल होने के बाद इसकी सच्चाई का पता चला, कि ये एक भाई है जो बैंक से कुछ पैसे निकालने के लिए अपनी बहन के कंकाल को बैंक लेकर गया था. जिसे दिखाकर वो बैंक कर्मियों को पुष्टि कर सकते कि उसकी बहन का निधन हो गया है. ये मामला इतना छोटा नहीं है बल्कि हर किसी के लिए सबक सीखने वाला है.
ये मामला कई सवाल खड़े करने वाला है. इस मामले में खाता धारक और नॉमिनी दोनों का ही निधन हो चुका है. ऐसे में जब एक भाई अपनी बहन के खाते से महज 20 हजार रुपये निकालने पहुंचा, तो अधूरे कागजात के कारण उसे बहन का मृत शरीर प्रूफ के तौर पर बैंक लेकर जाना पड़ा.
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बहुत कुछ सिखाता है ये मामला
ये मामला बैंक के कामों को लापरवाही से लेने वाले लोगों के लिए एक बड़ा सबक है. खाता धारकों को बैंक में सारे कागजात अच्छी तरह से जमा करना चाहिए. क्योंकि जब खाता धारक की मृत्यु हो जाए और नॉमिनी की भी मृत्यु हो जाए, तब खाते से पैसा निकालना काफी मुश्किल हो जाता है. खासतौर से तब जब बैंक में मृत्यु के बाद से डॉक्युमेंट्स जमा ना हो पाएं.
नॉमिनी होगा तो आसान होगी प्रक्रिया
यदि खाता धारक की मृत्यु हो जाए और खाते का नॉमिनी जीवित हो, तब ये प्रक्रिया आसान होती है. ऐसे में नॉमिनी इन पैसों का वारिस कहलाता है और आसानी से पैसे निकाल सकता है. हालांकि जब नॉमिनी की भी मृत्यु हो जाए तब खाते से पैसे निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में जब लीगल वारिस पैसे निकाले तो उसे इसी तरह की परेशानियां उठाना पड़ती हैं.
खाता धारक और नॉमिनी दोनों की मृत्यु होने पर क्या करें?
अगर खाता धारक की मृत्यु हो जाए और नॉमिनी भी ना हो तो उस स्थिति में थोड़ी मुश्किलें आ सकती हैं. इससे निपटने के लिए बैंक कानूनी वारिसों से कुछ दस्तावेज मांगता है, जैसे:
- लीगल हेयर (वारिस) सर्टिफिकेट
- परिवार रजिस्टर या शपथ पत्र
- सभी वारिसों की सहमति
- मृत्यु प्रमाणपत्र
दस्तावेज अधूरे हों तो क्या करें?
अगर आपके पास अधूरे दस्तावेज हैं, तो भी ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है, आपके पास कुछ विकल्प होते हैं, जैसे:
- इंडेम्निटी बॉन्ड (Indemnity Bond) देकर बैंक से क्लेम लिया जा सकता है.
- अन्य वारिसों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेकर प्रक्रिया आसान हो सकती है.
- छोटे अमाउंट (जैसे 5-10 लाख तक) के मामलों में कई बैंक आसान प्रक्रिया अपनाते हैं.
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खाता विवादित हो तो क्या करें?
यदि खाता विवादित हो, यानी उसके कई हकदार हों और आपस में झगड़ रहे हों तब एक सक्सेशन सर्टिफिकेट भी जमा करवाया जाता है.
- ये जिला अदालत से जारी होता है.
- इससे बैंक को ये स्पष्ट हो जाता है कि असली हकदार कौन है.
आपको बता दें कि हर बैंक की अपनी अलग प्रक्रिया होती है, जल्दीबाजी में गलत या अधूरे दस्तावेज देने से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. विवाद की स्थिति में कानूनी सलाह लेना बेहतर रहता है. ऐसे मामलों में सलाह मशवरा करके काम किया जाए तो ये आसान और बेहतर होता है.