Vedanta demerger: 5 टुकड़ों में बंटने जा रही माइनिंग दिग्गज वेदांता लिमिटेड, CEO अनिल अग्रवाल ने किया खुलासा


कौन सी नई कंपनियां बनेंगी? 

  • वेदांता एल्युमीनियम- एल्युमीनियम का कारोबार संभालेगी. 
  • वेदांता ऑयल एंड गैस- तेल और गैस का बिजनेस देखेगी.
  • वेदांता स्टील एंड फेरस- लोहे और स्टील के बिजनेस का देखरेख करेगी. 
  • वेदांता बेस मेटल्स- कॉपर और जिंक बिजनेस संभालेगी.
  • वेदांता पावर- बिजली उत्पादन का काम देखेगी.
  • वेदांता लिमिटेड- इंवेस्टमेंट और नए बिजनेस देखेगी जैसे की सेमीकंडक्टर 

क्यों वेदांता ने लिया डीमर्जर का फैसला? 

कंपनी ने अपने ऊपर से कर्ज के बोझ को कम करने के लिए यह फैसला लिया है. वेदांता ग्रुप की कंपनियों, खासकर वेदांता रिसोर्सेज पर बहुत ज्यादा कर्ज है. दिसंबर 2025 के अंत तक कंपनी पर लगभग 60624 करोड़ का कर्ज है. इसमें से वेदांता रिसोर्सेज पर मार्च 2025 तक लगभग 4.9 अरब डॉलर (41000 करोड़) रुपये का कर्ज है.

अनिल अग्रवाल ने बताया कि अगले तीन सालों में इस कर्ज को 3 अरब डॉलर कम किया जाएगा. डीमर्जर के बाद इस कर्ज को नई बनने वाली पांच कंपनियों में उनके कैश फ्लो और संपत्ति के आधार पर बांटा जाएगा. कंपनियां अलग होंगी, तो उनकी वैल्यू बढ़ेगी, जिससे जरूरत पड़ने पर हिस्सेदारी बेचकर कर्ज चुकाया जा सकता है. कंपनी का लक्ष्य कर्ज और मुनाफे के अनुपात को घटाना है. इसके अलावा, कंपनियां अलग होने से उनका मैनेजमेंट और बोर्ड अलग होगा, जिससे काम में तेजी आएगी और मुनाफा बढ़ेगा.

निवेशकों को फायदा

कंपनी के डीमर्जर से निवेशकों को फायदा होना है क्योंकि अगर अभी किसी के पास वेदांता लिमिटेड का 1 शेयर है, तो डीमर्जर के पास कुल 6 शेयर हो जाएंगे. वेदांता लिमिटेड का शेयर तो रहेगा ही, साथ ही 5 नई कंपनियों के शेयर भी मुफ्त में मिलेंगे. इसके लिए अलग से कोई पैसा नहीं देना होगा.डीमर्जर की प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होगी और मई के मध्य तक नई कंपनियां मार्केट में लिस्ट हो सकती हैं.



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