‘सड़क पर छुपकर रोता था…’, 10 साल तक खुद को ‘मनहूस’ मानते थे नवाजुद्दीन सिद्दीकी, एक्टर ने बयां किया दर्द

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नवाजु्द्दीन सिद्दीकी इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं. वह किसी भी फिल्म या फिर सीरीज में आते हैं तो कमाल ही कर जाते हैं. नवाजुद्दीन को इंडस्ट्री में लंबे स्ट्रगल के बाद पॉपुलैरिटी मिली थी. उन्हें पहली बार सलमान खान की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी फिल्मों से पहचान मिली थी. वह मुंबई सिर्फ 2500 रुपये लेकर मुंबई आए थे और गुजारा करने के लिए चौकीदार की नौकरी की. उनके लिए सफलता इतनी आसान नहीं थी. वह दशक तक मनहूस महसूस करते थे.

दरअसल, नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हाल ही में रेडियो नशा से बात की. इस दौरान उन्होंने अपने करियर, स्ट्रगल और फिल्मों तक के बारे में बात की. एक्टर ने कहा कि उन्हें पहचान और गौरव ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से मिला. वह इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए लंबे समय तक स्ट्रगल करते रहे थे.

खुद पर होने लगा था शक- नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाजुद्दीन सिद्दीकी आगे स्ट्रगल को लेकर बताते हैं, ‘जब मैं शुरू में इंडस्ट्री में आया था तो बहुत ही कॉन्फिडेंस के साथ आया था. खुद को मानकर आया था कि मैं एक्टर हूं. थिएटर से जो आता है वो ऐसा सोचकर ही आता है. लेकिन स्ट्रगल के थपेड़े खा-खाकर थोड़े से आत्मविश्वास की भी कमी हो जाती है. कई बार अपने पर शक होने लगता है कि जो सीखा वो गलत सीखा कि हमे काम नहीं मिल रहा.’

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10 साल तक मनहूस महसूस करते थे नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाजुद्दीन आगे कहते हैं, ‘मैंने वो मैंटल स्थिति देखी, जब खुद पर भी शक हुआ. एक शब्द होता है ना पनौती कि काम मिलते-मिलते हाथ से चला जाता था. कई बार लगता था कि मैं ही मनहूस हूं. मुझे तो 10 साल तक ऐसा लगता रहा कि मैं मनहूस हूं. क्योंकि जैसे ही कोई बड़ा काम आता था तो वो हाथ से छूट जाता था. मैं सबको बता देता था. लेकिन जब काम करने के दिन करीब आते थे तो मुझे काम से निकाल दिया जाता था और पता भी नहीं होता था.’

सड़क पर छुपकर रोते थे नवाजुद्दीन सिद्दीकी

इतना ही नहीं, नवाजुद्दीन सिद्दीकी आगे कहते हैं, ‘इन सब चीजों से इतने हताश और परेशान हो जाते थे कि कभी-कभी सड़क पर रोने का मन करता था. कई बार तो रो देते थे. लेकिन वो भी छुपकर रोते थे कि कोई देख ना ले.’

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Parle-G खाकर गुजारा करते थे नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपने पुराने समय को याद करते आगे कहते हैं, ‘मैं पार्ले जी बिस्कुट खाकर ही गुजारा करता था. आज भी जब मैं पार्ले जी खाता हूं तो मुझे दिल्ली की याद आ जाती है. नाश्ता, दोपहर का खाना, रात का खाना सब में पार्ले जी ही खाता था. आज जब भी मैं ये खाता हूं तो ऐसा लगता है कि जैसे मेरे पास कुछ भी खाने के लिए नहीं है. इसका स्वाद आज बिल्कुल तकलीफ देता है.’

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का वर्कफ्रंट

बहरहाल, अगर नवाजुद्दीन सिद्दीकी के वर्कफ्रंट के बारे में बात की जाए तो वह इन दिनों फिल्म ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ को लेकर चर्चा में हैं. इन दिनों वह इसके प्रमोशन में बिजी हैं. फिल्म को 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा. इसके अलावा वह ‘तुम्बाड 2’ में भी नजर आने वाले हैं, जिसे 3 दिसंबर, 2027 को रिलीज किया जाएगा.



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