Fatty Liver Without Alcohol: बिना शराब छुए भी बीमार हो सकता है आपका लिवर, जानें क्या है ‘साइलेंट किलर’ फैटी लिवर

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Why Fatty Liver Happens Without Alcohol: सिर्फ हेल्दी दिखने भर से लिवर स्वस्थ रहेगा, ऐसा मानना अब सही नहीं रह गया है. आजकल डॉक्टर ऐसे लोगों में भी फैटी लिवर की समस्या देख रहे हैं जो न शराब पीते हैं, न धूम्रपान करते हैं और घर का खाना ही खाते हैं. यह स्थिति इसलिए उलझन भरी लगती है क्योंकि बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर पर दबाव बढ़ता रहता है. असल वजह हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें हैं, जिन पर अक्सर ध्यान ही नहीं जाता. 

लाइफस्टाइल से जुड़ी है बीमारी

डॉक्टरों के मुताबिक, नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज तेजी से बढ़ने वाली लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी बन चुकी है. यह तब होता है जब बिना शराब के सेवन के भी लिवर में फैट जमा होने लगता है. साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित एक बड़ी स्टडी बताती है कि शहरी भारत में यह समस्या अब आम होती जा रही है और इसका सीधा संबंध हमारी बदलती लाइफस्टाइल से है.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. आम्रपाली पाटिल ने TOI को बताया कि “यह एक आम गलतफहमी है कि लिवर की बीमारी सिर्फ शराब से होती है। कई नॉन-अल्कोहोलिक कारण भी लिवर के कामकाज को प्रभावित करते हैं.” दरअसल, जिस नॉर्मल डाइट को हम सही मानते हैं, वह अब पहले जैसी नहीं रही. रिफाइंड आटा, छिपी हुई शुगर, पैकेज्ड स्नैक्स और बार-बार बाहर का खाना मंगाना धीरे-धीरे लिवर में फैट जमा करने लगता है. लिवर का काम शरीर में जाने वाली हर चीज को प्रोसेस करना है, लेकिन जब यह ओवरलोड हो जाता है तो फैट जमा होने लगता है.

इसके अलावा, कम चलना-फिरना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना और नींद की कमी मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन  के अनुसार, शारीरिक एक्टिविटी न करने की वजह से  मेटाबॉलिक बीमारियों का बड़ा कारण है. कुछ कारण ऐसे भी हैं जिन पर लोग ध्यान नहीं देते, वह है जैसे लंबे समय तक दवाइयों का सेवन, क्रैश डाइटिंग, अनियमित खाने की आदतें और अचानक तेजी से वजन कम करना. डॉ. पाटिल के अनुसार, “ये सभी चीजें लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं और समय के साथ समस्या को बढ़ा सकती हैं.”

शुरूआत में दिखाई नहीं देते हैं लक्षण

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. हल्की थकान, पेट फूलना या सामान्य असहजता को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. डॉ. पाटिल बताती हैं कि शुरुआती चरण में मरीज बिना किसी खास लक्षण के भी हो सकते हैं, और जब तक समस्या समझ आती है, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. इससे बचने के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है, बल्कि छोटे और लगातार किए जाने वाले सुधार ज्यादा असरदार होते हैं. प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा मीठे पेय, देर रात खाना और बिना जरूरत के सप्लीमेंट्स लेने से बचना चाहिए. लिवर की सेहत के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, संतुलित आहार और अच्छी नींद बेहद जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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