- आधुनिक परीक्षा में समझना महत्वपूर्ण, शिक्षक-अभिभावक भी सहयोग करें.
परीक्षा का समय आते ही ज्यादातर बच्चे किताबों को बार-बार पढ़कर उन्हें याद करने की कोशिश करते हैं. कई छात्र घंटों तक रटाई करते हैं, लेकिन परीक्षा खत्म होने के कुछ दिनों बाद ही सब कुछ भूल जाते हैं.शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रटने की आदत लंबे समय तक याद रखने में मदद नहीं करती है. अगर पढ़ाई को सही तरीके से समझकर किया जाए और कुछ आसान तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो वही जानकारी लंबे समय तक दिमाग में बनी रहती है.
आखिर क्या है रटकर पढ़ाई करना?
रटकर पढ़ाई करने का मतलब है किसी जानकारी को उसका मतलब समझे बिना बार-बार दोहराना है.जैसे कई बच्चे गणित के पहाड़े, परिभाषाएं या सामान्य ज्ञान के सवाल सिर्फ याद कर लेते हैं, लेकिन उनका उपयोग कब और कैसे करना है, यह नहीं समझ पाते. इस वजह से परीक्षा के बाद ऐसी जानकारी जल्दी भूल जाती है.
समझकर पढ़ना क्यों है ज्यादा असरदार?
जब कोई छात्र किसी विषय को समझकर पढ़ता है, तो उसका दिमाग उस जानकारी को पहले से मौजूद ज्ञान से जोड़ देता है.इससे पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रहता है और जरूरत पड़ने पर आसानी से याद भी आ जाता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ केवल रटने की बजाय समझने पर ज्यादा जोर देते हैं.
पढ़ाई लंबे समय तक याद रखने के 5 आसान तरीके
- पूरे अध्याय को एक साथ याद करने की बजाय उसे छोटे-छोटे भागों में बांटकर पढ़ें. इससे दिमाग पर कम दबाव पड़ता है और हर विषय को आसानी से याद रखा जा सकता है.
- अगर किसी कठिन विषय को किसी कहानी, रोजमर्रा की घटना या अपने अनुभव से जोड़कर पढ़ेंगे, तो उसे याद रखना काफी आसान हो जाएगा.इस तरीके से दिमाग जानकारी को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखता है.
- किसी भी विषय को पढ़ने के बाद उसे अपनी भाषा में जोर से बोलकर दोहराएं. ऐसा करने से याददाश्त मजबूत होती है और यह पता भी चल जाता है कि कौन-सा हिस्सा अभी पूरी तरह समझ में नहीं आया है.
- जरूरी पॉइंट्स को अलग-अलग रंगों से हाईलाइट करें या चार्ट और माइंड मैप बनाएं. रंग और चित्र दिमाग को जानकारी जल्दी याद रखने में मदद करते हैं और पढ़ाई भी दिलचस्प बन जाती है.
- एक बार पढ़कर छोड़ देने की बजाय समय-समय पर उसी विषय को दोहराते रहें. अगर पहले दिन, फिर दो दिन बाद और उसके बाद एक सप्ताह में दोहराव किया जाए, तो जानकारी लंबे समय तक याद रहती है.
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सिर्फ याद करना नहीं, समझना भी जरूरी
आज की पढ़ाई में केवल सवाल याद कर लेना काफी नहीं है. प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल के नए पैटर्न में ऐसे सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें समझ और तर्क की जरूरत होती है. इसलिए बच्चों को शुरुआत से ही समझकर पढ़ने की आदत डालनी चाहिए.इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे किसी भी सवाल का जवाब आसानी से दे पाते हैं.
माता-पिता और शिक्षकों की भी अहम भूमिका
बच्चों पर सिर्फ ज्यादा पढ़ने का दबाव बनाने की बजाय उन्हें सही तरीके से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. माता-पिता और शिक्षक अगर बच्चों को उदाहरण देकर समझाएं, सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें और नियमित अभ्यास करवाएं, तो पढ़ाई ज्यादा प्रभावी बन सकती है. इससे बच्चों में सीखने की रुचि भी बढ़ती है और उनका प्रदर्शन बेहतर होता है.
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