Difference Between Mumbai And Delhi: विदेशी ट्रैवलर्स ने दिल्ली को क्यों दिए ‘0’ नंबर? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

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Which City Is Better Mumbai Or Delhi For Tourists: मुंबई बनाम दिल्ली दो शहर, एक तुलना और ऐसा फैसला जिसने लोगों को चौंका दिया. यात्रा से जुड़े वीडियो बनाने वाले स्टीव और इवाना ने जब मुंबई और दिल्ली की तुलना की, तो यह सिर्फ दो शहरों का सामान्य आकलन नहीं था, बल्कि लोगों की सोच को छू जाने वाली बात बन गई.  उन्होंने मुंबई को पर्यटक अनुभव के तौर पर दिल्ली से “सौ बनाम शून्य” बताया, जिसके बाद लोगों के बीच बहस भी शुरू हो गई. 

क्या है मामला?

असल में यह कहानी दो विदेशी यात्रियों के नजरिए की है, जो शहरों को सिर्फ देखने से नहीं, बल्कि महसूस करने से समझते हैं. वीडियो की शुरुआत में ही स्टीव साफ कहते हैं कि मुंबई दिल्ली से कहीं आगे है और फिर अपने अनुभव के आधार पर इसकी वजह भी बताते हैं. 

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मुंबई का अनुभव

मुंबई में घूमते हुए स्टीव को सबसे ज्यादा जो चीज महसूस हुई, वह थी भीड़ के बीच खुद का अनदेखा रह जाना. उनका कहना है कि वहां किसी को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह कौन हैं या कहां से आए हैं. उन्होंने इसे एक तरह की आज़ादी बताया. भीड़, शोर और लगातार बजते वाहन के हॉर्न के बावजूद उन्हें वहां सहज महसूस हुआ.  उनके अनुसार, एक यात्री के तौर पर वहां कोई उन्हें परेशान नहीं करता, जिससे वे खुलकर शहर को देख और महसूस कर पाए. 

 

इवाना भी इस अनुभव से सहमत दिखती हैं. उनके लिए मुंबई ऐसा शहर रहा, जहां वे बिना किसी दखल के सब कुछ देख सकती थीं. स्टीव ने वहां की इमारतों और पुरानी वास्तुकला की भी तारीफ की. उन्होंने बताया कि शहर में अलग-अलग दौर की झलक मिलती है, कहीं पुरानी विदेशी शैली का असर दिखता है तो कहीं दूसरी तरह की बनावट. यही विविधता शहर को खास बनाती है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इतनी बड़ी और शोर भरी जगह में रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता.

दिल्ली में कैसा रहा अनुभव?

वहीं दिल्ली में उनका अनुभव बिल्कुल अलग रहा. स्टीव के मुताबिक, वहां लोग उन्हें लगातार देख रहे थे, उनके आसपास जमा हो रहे थे और उनसे बात करने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने खुद को जैसे आकर्षण का केंद्र महसूस किया। यह अनुभव उनके लिए थोड़ा भारी साबित हुआ. दरअसल, दिल्ली और मुंबई दोनों की सामाजिक बनावट अलग है. दिल्ली में लोग ज्यादा सीधे और खुलकर बातचीत करने वाले होते हैं, जबकि मुंबई में लोग अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहते हैं. यही फर्क यात्रियों के अनुभव को भी बदल देता है.

दोनों में क्या है अंतर?

कुछ लोगों के लिए मुंबई की यह दूरी सुकून देती है तो कुछ के लिए यह अलगाव जैसा लग सकता है. वहीं दिल्ली की खुली बातचीत कुछ के लिए रोचक होती है, तो कुछ के लिए ज्यादा भारी पड़ सकती है.

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