शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और जिलों की स्कूल शिक्षा पर नई रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस राज्य और जिले में स्कूलों की स्थिति कैसी है और बच्चों की पढ़ाई कितनी अच्छी हो रही है?
क्या है इस रिपोर्ट कार्ड में?
जानकारी के मुताबिक, यह राज्यों और जिलों की स्कूल शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड है. जैसे बच्चों को परीक्षा में नंबर मिलते हैं, वैसे ही राज्यों और जिलों को भी उनके काम के आधार पर अंक और ग्रेड दिए गए हैं.
किन पॉइंट्स पर किया गया फोकस?
इस रिपोर्ट में सिर्फ यह नहीं देखा गया कि स्कूल कितने हैं, बल्कि यह भी देखा गया है कि बच्चे ठीक से पढ़ और सीख रहे हैं या नहीं? स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हैं या नहीं? बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं? बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और पढ़ाई में डिजिटल तकनीक का कितना इस्तेमाल हो रहा है?
इन 6 मानकों पर हुआ मूल्यांकन
रिपोर्ट के मुताबिक, जिलों का मूल्यांकन 6 बड़े मानकों पर किया गया है. इनमें सीखने के नतीजे (Outcomes), कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता (Effective Classroom Interactions), स्कूलों का बुनियादी ढांचा और छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं (Infrastructure & Student Entitlements), स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण (School Safety & Child Protection), डिजिटल लर्निंग (Digital Learning) और शिक्षा व्यवस्था का संचालन (Governance Process) शामिल हैं.
कैसे दिए गए ग्रेड?
रिपोर्ट में राज्यों और जिलों को उनके कुल अंकों के आधार पर अलग-अलग ग्रेड दिए गए हैं.
- उत्कर्ष: 91 से 100 प्रतिशत
- उत्तम-1: 81 से 90 प्रतिशत
- उत्तम-2: 71 से 80 प्रतिशत
- उत्तम-3: 61 से 70 प्रतिशत
- प्रचेष्टा-1: 51 से 60 प्रतिशत
- प्रचेष्टा-2: 41 से 50 प्रतिशत
- प्रचेष्टा-3: 31 से 40 प्रतिशत
- आकांशी-1: 21 से 30 प्रतिशत
- आकांशी-2: 11 से 20 प्रतिशत
- आकांशी-3: 10 प्रतिशत तक
राष्ट्रीय तस्वीर क्या बताती है?
जारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में देश का कोई भी जिला सबसे ऊंचे ‘उत्कर्ष’ (91-100%) या ‘उत्तम-1’ (81-90%) ग्रेड तक नहीं पहुंच सका. सबसे zyada जिले ‘प्रचेष्टा-1’ (51-60%) और ‘प्रचेष्टा-2’ (41-50%) श्रेणी में रहे. इसके मुकाबले ‘आकांशी’ श्रेणियों में जिलों की संख्या काफी कम रही. इससे संकेत मिलता है कि बहुत खराब प्रदर्शन वाले जिलों की संख्या घटी है, लेकिन शीर्ष स्तर तक पहुंचने वाले जिले अब भी नहीं हैं. राष्ट्रीय स्तर पर 2023-24 की तुलना में ‘प्रचेष्टा-1’ और ‘उत्तम-3’ श्रेणी में जिलों की संख्या बढ़ी है, जबकि ‘प्रचेष्टा-2’ और ‘प्रचेष्टा-3’ में जिलों की संख्या कम हुई है. इसका मतलब है कि कई जिले धीरे-धीरे बेहतर ग्रेड की ओर बढ़े हैं.
दिल्ली का प्रदर्शन
दिल्ली के 13 जिलों की बात करें तो 2024-25 में 9 जिले ‘उत्तम-3’ (61-70%), 4 जिले ‘उत्तम-2’ (71-80%) और 3 जिले ‘प्रचेष्टा-1’ (51-60%) श्रेणी में रहे. दिल्ली का कोई भी जिला ‘उत्कर्ष’ या ‘उत्तम-1’ ग्रेड हासिल नहीं कर सका, लेकिन एक भी जिला ‘आकांशी’ श्रेणी में नहीं है. इससे साफ है कि दिल्ली के सभी जिले अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन वाले वर्ग में बने हुए हैं.
रिपोर्ट में अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर जिलों की रैंकिंग भी दी गई है. उदाहरण के तौर पर डिजिटल लर्निंग श्रेणी में दक्षिण (South) जिला 39 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि नई दिल्ली और दक्षिण-पश्चिम-बी (South West B-I) 36-36 number के साथ उसके बाद रहे. वहीं, नॉर्थ वेस्ट-ए (North West A) को इस श्रेणी में 33 नंबर मिले.
दूसरे राज्यों की हाल
रिपोर्ट में राज्यों के अंदर भी जिला स्तर की तुलना की गई है. उदाहरण के लिए, गोवा के दोनों जिले ‘प्रचेष्टा’ श्रेणी में हैं, जबकि हरियाणा के अधिकांश जिले भी ‘प्रचेष्टा-2’ और ‘प्रचेष्टा-3’ ग्रेड में दिखाई देते हैं. इससे साफ है कि लगभग सभी राज्यों में शिक्षा सुधार की गुंजाइश अभी बनी हुई है.
सरकार का कहना है कि इस रिपोर्ट का मकसद राज्यों और जिलों की कमियां पहचानना और उन्हें बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि पूरे देश में स्कूलों की पढ़ाई की गुणवत्ता सुधर सके. यह रिपोर्ट केवल रैंकिंग बताने के लिए नहीं, बल्कि यह समझने के लिए भी है कि किस क्षेत्र में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत है.
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