Fixed Deposit Rules: मैच्योरिटी से पहले एफडी बंद करने पर बैंक कितना काटते हैं चार्ज? जानें नियम

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Fixed Deposit: आमतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट को सबसे ज्यादा सुरक्षित निवेश के रूप में माना जाता है. जहां, लोग सालों के लिए अपना पैसा सुरक्षित तरह से बिना किसी परेशानी के जमा करते हैं. लेकिन, ज्यादातर लोग यह सोचकर भी अपनी एफडी करवाते हैं कि अवधि पूरी होने से पहले वे जमा किए गए पैसे की तरफ देखेंगे भी नहीं. आप से बेहद ही कम लोगों को इस बारे में जानकारी होगी कि अचानक जरूरत पड़ने पर समय से पहले एफडी तोड़ना आपका कितना भारी पड़ सकता है और क्यों?

एफडी तोड़ना क्यों पड़ सकता है भारी?

ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि एफडी को बीच में ही तोड़ने पर बैंक ज्यादा से ज्यादा जुर्माना के तौर पर उनकी रकम को काटेगा. लेकिन, जल्दबाजी के चक्कर में लोग यह भूल जाते हैं कि बैंक आपके मुनाफे का पूरा हिसाब-किताब ही बदल देती है. जैसे उदाहरण के लिए, अगर आपने 5 साल के लिए एफडी की थी और किसी कारणवर्श उसे एक साल के अंदर ही तोड़ दिया तो बैंक आपको 5 साल वाली उच्च ब्याज दर का फायदा देने से पूरी तरह से साफ इंकार कर देगा. 

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इतना ही नहीं, बैंक उन जमा की गई राशि पर सिर्फ और सिर्फ 1 साल वाली कम अवधि की ब्याज दर को पूरी तरह से लागू भी कर देगा. तो  वहीं, दूसरी तरफ कम अवधि की ब्याज दर लागू होने के बाद आपका  बैंक उस पर 0.5 प्रतिशत से 1 प्रतिशत तक का जुर्माना अलग से लगाएगा.  

आखिर क्या है बैंकों के विभिन्न नियम? 

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि एफडी तोड़ने के नियम हर बैंकों में अलग-अलग होते हैं. जिसको लेकर कुछ बैंक वरिष्ठ नागरिकों को जुर्माने में थोड़ी छूट देने का काम करते हैं. इसके अलावा, अन्य बैंकों में तो, ‘नो-पेनल्टी एफडी’ भी उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें सामान्य एफडी के मुकाबले शुरुआत से ही ब्याज दर लोगों को कम दिया जाता है. 

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एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि एफडी अगर आप समय से पहले तोड़ देते हैं तो, जितने दिन भी आपका पैसा बैंक में रहा और उस पर जो भी ब्याज बनेगा, वह पूरी तरह से टैक्सेबल माना जाएगा. ऐसे में यह लगने वाला टैक्स आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से कटेगा जिससे हाथ में आने वाला पैसा और घट जाएगा. इसलिए, एफडी तोड़ने का कदम उठाने से पहले अपने बैंक के नियमों और नुकसान के बारे में अच्छी तरह से जानना बेहद ही अनिवार्य होता है. 



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