Weekly Insulin Launch In India 2026: डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी खबर है. भारत में अब ऐसा इंसुलिन उपलब्ध हो गया है, जिसे हर दिन नहीं बल्कि पूरे हफ्ते में सिर्फ एक बार लेना होगा. फार्मास्युटिकल कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने ‘अवीक्ली’ ब्रांड नाम से अपना वीकली इंसुलिन लॉन्च किया है. कंपनी का दावा है कि यह दवा उन मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, जिन्हें रोजाना इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं या जो बार-बार सुई लगवाने से बचते हैं.
किन लोगों लिए फायदेमंद?
डॉक्टरों का कहना है कि कई डायबिटीज मरीज इंसुलिन शुरू करने से सिर्फ इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें रोज इंजेक्शन लेने का डर रहता है. कुछ लोग लगातार यात्रा करते हैं, जबकि कई लोगों की व्यस्त दिनचर्या के कारण रोजाना समय पर इंसुलिन लेना मुश्किल हो जाता है. ऐसे मरीजों के लिए सप्ताह में एक बार लगने वाला यह इंसुलिन इलाज को पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान बना सकता है.
बड़ी संख्या में मरीज इंसुलिन लेने से बचते हैं
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. एस. के. वांगनू के अनुसार, जिन मरीजों को डायबिटीज हुए 8 से 10 साल हो चुके हैं और जिनकी ब्लड शुगर दवाइयों से नियंत्रित नहीं हो रही है, उन्हें समय पर इंसुलिन शुरू कर देना चाहिए. ऐसा करने से आंखों, किडनी, नसों और शरीर के अन्य अंगों को होने वाले नुकसान का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज इंसुलिन लेने से बचते हैं, जिससे भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया का कहना है कि फिलहाल भारत में करीब 60 लाख लोग इंसुलिन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि इसकी जरूरत इससे कहीं ज्यादा लोगों को है. उनका मानना है कि सप्ताह में सिर्फ एक बार लगने वाला इंसुलिन इलाज को आसान बनाएगा और इससे ज्यादा मरीज डॉक्टर की सलाह पर इंसुलिन लेना शुरू करेंगे.
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कितनी होगी कीमत
अगर कीमत की बात करें तो यह नया इंसुलिन बाजार में मौजूद कई दूसरे इंसुलिन विकल्पों की तुलना में सस्ता बताया जा रहा है. कंपनी के मुताबिक इसकी औसत लागत करीब 261 रुपये प्रति सप्ताह यानी लगभग 50 रुपये प्रतिदिन पड़ती है. यह दवा दो प्री-फिल्ड पेन में उपलब्ध होगी. पहला 700 यूनिट/मिली वाला पेन 2,611 रुपये और दूसरा 2,100 यूनिट/मिली वाला पेन 7,883 रुपये का है. आमतौर पर एक मरीज को सप्ताह में करीब 70 यूनिट इंसुलिन की जरूरत पड़ती है, हालांकि डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार इसकी मात्रा तय करेंगे. कंपनी का मानना है कि इस नई तकनीक से ज्यादा से ज्यादा मरीज समय पर इंसुलिन लेना शुरू करेंगे. इससे ब्लड शुगर को लंबे समय तक नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी और HbA1c का स्तर भी बेहतर हो सकता है. HbA1c वह टेस्ट होता है, जिससे पिछले लगभग तीन महीनों की औसत ब्लड शुगर का पता चलता है.
क्या इसके नुकसान भी हैं?
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस दवा के कुछ संभावित साइड इफेक्ट भी हैं. सबसे सामान्य दुष्प्रभाव हाइपोग्लाइसीमिया है, यानी ब्लड शुगर का जरूरत से ज्यादा कम हो जाना. डॉक्टरों के अनुसार यह जोखिम रोजाना लगाए जाने वाले इंसुलिन जितना ही है. वहीं टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में लो ब्लड शुगर की समस्या कुछ अधिक देखने को मिल सकती है. ऐसे मरीजों को भोजन से पहले लगने वाला फास्ट-एक्टिंग इंसुलिन पहले की तरह जारी रखना होगा, जबकि रोज लगने वाले लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन की जगह इस साप्ताहिक इंसुलिन का इस्तेमाल किया जा सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह नया इंसुलिन मरीजों के लिए सुविधा जरूर बढ़ाता है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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