Explained: आंत-पेट में ऑक्सीजन पहुंचना बंद, शरीर में खून के थक्के और किस्सा खत्म! कितनी गर्मी झेलने के बाद कैसे हो जाती मौत?

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दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की लिस्ट में सूडान, चाड, ईरान या मिडिल ईस्ट के रेगिस्तानी इलाकों का नाम होना चाहिए. लेकिन हैरान करने वाली सच्चाई ये है कि इस पूरी लिस्ट में से 97 शहर अकेले भारत के हैं. ये कोई मजाक नहीं, बल्कि मई 2026 की वो भयानक सच्चाई है जिसने पूरे देश को झुलसा कर रख दिया है. बालंगीर, सासाराम, बांदा और वाराणसी जैसे शहरों में पारा 48 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है. हालात इतने बदतर हैं कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में अब तक 37 से ज्यादा लोग हीटवेव की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं.

ये कहानी सिर्फ आसमान से बरसती आग की नहीं है, ये कहानी है हमारे शरीर की उस आखिरी लड़ाई की, जो ये भीषण गर्मी से लड़ रहा है. आइए समझते हैं कि ये रिकॉर्डतोड़ गर्मी में हमारा शरीर कितना तापमान झेल सकता है, गर्मी आखिर जान कैसे ले लेती है और हम इस आफत से खुद को और अपनों को कैसे बचा सकते हैं…

दुनिया की सबसे गर्म लिस्ट पर भारत का कब्जा: 97 शहर, एक कहानी

22 मई 2026 की दोपहर AQI.in के लाइव डेटा ने जो तस्वीर पेश की, वो डराने वाली थी. दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 97 भारत में थे. बालंगीर (ओडिशा) और सासाराम (बिहार) में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जबकि वाराणसी (उत्तर प्रदेश) 47 डिग्री सेल्सियस के साथ तीसरे नंबर पर रहा। इन शहरों में नमी का स्तर 6 से 8 प्रतिशत के बीच था, जो स्थितियों को ‘बेहद गर्म’ (एक्सट्रीम हॉट) कैटेगरी में डाल रहा था.

गौर करने वाली बात ये है कि इस लिस्ट में बाकी तीन शहर भी भारत के पड़ोसी देश नेपाल के थे- धनगढ़ी, नेपालगंज और लुम्बिनी संस्कृतिक. मतलब पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गर्मी भारतीय उपमहाद्वीप में पड़ रही थी. ये कोई पहली बार नहीं है. इससे पिछले हफ्ते 19 मई को तो हालात और भी गंभीर थे, जब दुनिया के सभी 100 सबसे गर्म शहर भारत में ही थे. औरैया, बांदा और इटावा (तीनों उत्तर प्रदेश) 46 डिग्री सेल्सियस के साथ टॉप पर थे.

आखिर इंसानी शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है?

ये सवाल शायद आपके मन में भी आया होगा. इसका जवाब सिर्फ थर्मामीटर पर लिखे नंबर में नहीं, बल्कि एक खास टर्म में छिपा है- ‘वेट-बल्ब टेम्परेचर’

वेट-बल्ब टेम्परेचर दरअसल तापमान और नमी का वो खतरनाक कॉम्बिनेशन है जो हमारे शरीर की ठंडा होने की क्षमता को पूरी तरह बंद कर देता है. आमतौर पर हमारा शरीर पसीने को भाप बनाकर खुद को ठंडा रखता है. लेकिन जब हवा में बहुत ज्यादा नमी हो, तो पसीना सूखता नहीं, शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और शरीर का तापमान लगातार बढ़ता जाता है.

लंबे समय तक ये माना जाता रहा कि 35 डिग्री सेल्सियस का वेट-बल्ब तापमान (जो 100% नमी पर 35 डिग्री सेल्सियस या 50% नमी पर 46 डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है) वो आखिरी हद है, जिसके बाद इंसानी शरीर खुद को ठंडा नहीं रख सकता. लेकिन पेन स्टेट यूनिवर्सिटी की एक चौंकाने वाली रिसर्च ने इस मिथक को तोड़ दिया. उनके PSU H.E.A.T. प्रोजेक्ट में जब युवा और स्वस्थ लोगों को अलग-अलग तापमान और नमी में रखा गया, तो पता चला कि शरीर की ठंडा रहने की क्षमता 35 डिग्री सेल्सियस से काफी पहले ही खत्म होने लगती है.

नई रिसर्च के मुताबिक, ये खतरनाक हद सिर्फ 31 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब तापमान पर ही शुरू हो जाती है.

इसे ऐसे समझिए- अगर नमी 100% हो तो 31 डिग्री सेल्सियस और अगर नमी 60% हो तो 38 डिग्री सेल्सियस का सामान्य तापमान भी जानलेवा हो सकता है. ‘हमारी रिसर्च बताती है कि गर्मी और नमी का खतरनाक कॉम्बिनेशन, वैज्ञानिकों के पिछले अनुमान से कहीं ज्यादा तेजी से जानलेवा बन सकता है.’

कैसे होती है गर्मी से मौत?

गर्मी से मौत का सबसे बड़ा कारण है हीटस्ट्रोक, यानी शरीर का तापमान इतना बढ़ जाना कि अंग काम करना बंद कर दें. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्मी तीन अलग-अलग तरीकों से जान लेती है?

  1. हीटस्ट्रोक: जब दिमाग और अंग सब फेल हो जाएं. जब शरीर का अंदरूनी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर जाता है, तब हीटस्ट्रोक होता है. यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के प्रोफेसर ओली जे बताते हैं कि इस दौरान शरीर ठंडा होने के लिए खून की धारा को त्वचा की तरफ मोड़ देता है. इसका नतीजा ये होता है कि आंतों और पेट तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है. नतीजा? आंतों में मौजूद टॉक्सिन्स खून में लीक होने लगते हैं. ‘ये एक चेन रिएक्शन शुरू करता है. पूरे शरीर में खून के थक्के बनने लगते हैं, एक के बाद एक अंग फेल होने लगते हैं और आखिर में मौत हो जाती है.’
  2. दिल पर जानलेवा दबाव: ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल के इमरजेंसी मेडिसिन डायरेक्टर नील गांधी बताते हैं कि गर्मी के दौरान वो अक्सर ऐसे मरीज देखते हैं जिनके शरीर का तापमान 104 या 105 डिग्री फॉरेनहाइट से भी ऊपर पहुंच जाता है. ‘बस कुछ डिग्री और बढ़ने पर ऐसे मरीज की जान जाने का बहुत ज्यादा खतरा हो जाता है.’ गर्मी में शरीर ठंडा रहने के लिए दिल को सामान्य से कई गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. प्रोफेसर जे के के मुताबिक, ‘आप अपने दिल से सामान्य से बहुत ज्यादा काम करवा रहे होते हैं. जिसे पहले से दिल की बीमारी है, उसके लिए तो ये ऐसा है जैसे खराब हैमस्ट्रिंग (जांघ की मांसपेशी) के साथ बस दौड़ने की कोशिश करना. कुछ न कुछ तो टूटेगा ही.’
  3. डिहाइड्रेशन: पसीने के जरिए शरीर से इतना पानी निकल जाता है कि किडनी पर जबरदस्त दबाव पड़ता है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर रेनी सालास बताती हैं, ‘डिहाइड्रेशन शॉक में बदल सकता है, जिससे अंगों तक खून, ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचना बंद हो जाते हैं. इससे दौरे पड़ सकते हैं और मौत हो सकती है.’ इसके अलावा, गर्मी दिमाग पर भी सीधा असर करती है. इससे इंसान कन्फ्यूज हो जाता है, सोचने-समझने की शक्ति खो देता है और बेहोश हो सकता है.

अभी तक सरकारी रिकॉर्ड में पूरे भारत में हीटवेव से करीब 37-40 मौतें दर्ज की गई हैं. लेकिन ये आंकड़ा असलियत से बहुत कम है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत सारी मौतें जो गर्मी की वजह से होती हैं (जैसे हार्ट अटैक), उन्हें कभी हीटवेव से हुई मौतों में नहीं गिना जाता. अल जजीरा की रिपोर्ट बताती है कि देश में गर्मी से होने वाली ज्यादातर मौतें रिकॉर्ड ही नहीं की जातीं. असल मौतों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है.

तो फिर गर्मी की मौत से कैसे बचें?

इस भीषण गर्मी से बचाव के लिए सरकार ने साफ गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, भले ही प्यास न लगी हो.
  • हल्के रंग के ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें.
  • बाहर निकलते वक्त सिर को कपड़े, स्कार्फ, टोपी या छाते से ढकें.
  • ORS, छाछ, नींबू पानी, नमकीन लस्सी और नारियल पानी जैसे घरेलू ड्रिंक्स लें.
  • कच्चा प्याज, कच्चा आम, नमक और जीरा जैसी चीजें खाएं, जो लू से बचाती हैं.

इसके अलावा भूलकर भी न करें:

  • दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर न निकलें.
  • चाय, कॉफी, शराब और कोल्ड ड्रिंक्स से बचें. ये शरीर का पानी तेजी से कम करते हैं.
  • ज्यादा प्रोटीन वाला, तला-भुना, मसालेदार और बासी खाना न खाएं.
  • बच्चों या पालतू जानवरों को खड़ी गाड़ी में अकेला न छोड़ें.
  • नंगे पैर बाहर न निकलें.

आखिर गर्मी से राहत कब मिलेगी?

IMD के मुताबिक, फिलहाल राहत के कोई आसार नहीं हैं. देश के ज्यादातर हिस्सों में 28 मई तक हीटवेव जारी रहेगी. दिल्ली के लिए 25 से 27 मई के बीच ‘गंभीर हीटवेव’ (सीवियर हीटवेव) का ऑरेंज अलर्ट है, जिसमें तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. IMD का कहना है कि 28 मई के बाद कई इलाकों में तेज आंधी और बारिश से तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है.

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