देश में 10 साल में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की बाढ़, सरकारी संस्थानों की रफ्तार रही सुस्त

a46e09c35b1bca80fd16e879795a1f7017836816491811294 original


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • सरकारी में छात्रों की हिस्सेदारी घटी, निजी विश्वविद्यालयों में नामांकन 32% हुआ.

देश में हायर एजुकेशन तेजी से बदल रही है. पिछले एक दशक में विश्वविद्यालयों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव निजी विश्वविद्यालयों के विस्तार के रूप में सामने आया है. शिक्षा मंत्रालय के ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि 2013-14 से 2023-24 के बीच भारत में 550 से ज्यादा नए विश्वविद्यालय जुड़े, जिनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी निजी संस्थानों की रही.

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2013-14 में देश में कुल 723 विश्वविद्यालय थे, जो 2023-24 तक बढ़कर 1,279 हो गए. यानी दस साल में विश्वविद्यालयों की कुल संख्या में करीब 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. हालांकि इस दौरान निजी विश्वविद्यालयों का विस्तार सरकारी विश्वविद्यालयों की तुलना में कहीं अधिक तेज रहा.

एक दशक पहले देश में 219 निजी विश्वविद्यालय थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 546 हो गई है. यानी इनकी संख्या में करीब 149 प्रतिशत का इजाफा हुआ. दूसरी ओर, सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या 504 से बढ़कर 733 पहुंची, जो करीब 45 प्रतिशत की वृद्धि है. इसका मतलब है कि निजी विश्वविद्यालय सरकारी संस्थानों की तुलना में तीन गुना से अधिक तेजी से बढ़े हैं.

सबसे आगे ये स्टेट

राज्यों की बात करें तो इस दौड़ में सबसे बड़ा बदलाव गुजरात में देखने को मिला. 2013-14 में यहां केवल 16 निजी विश्वविद्यालय थे, लेकिन 2023-24 तक इनकी संख्या बढ़कर 67 हो गई. यानी दस साल में राज्य में 51 नए निजी विश्वविद्यालय जुड़े, जो देश में सबसे अधिक है. इसके बाद मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां 41 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित हुए.

एक समय प्राइवेट विश्वविद्यालयों की संख्या के मामले में राजस्थान पहले स्थान पर था. वर्ष 2013-14 में यहां 39 निजी विश्वविद्यालय थे, लेकिन अब गुजरात ने उसे पीछे छोड़ दिया है. वर्तमान में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या के लिहाज से गुजरात के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष राज्यों में शामिल हैं.

यह भी पढ़ें – भारत में सरकारी नौकरी का इतना क्रेज क्यों, विदेशों में क्यों अलग है युवाओं की सोच?

वहीं सरकारी विश्वविद्यालयों के मामले में तस्वीर काफी हद तक स्थिर रही. उत्तर प्रदेश पहले भी सबसे आगे था और आज भी शीर्ष पर बना हुआ है. यहां सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या 35 से बढ़कर 58 हो गई. कर्नाटक ने भी दूसरा स्थान बरकरार रखा, जबकि पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश ने शीर्ष पांच राज्यों में जगह बनाई.

हालांकि विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि छात्रों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ी हो. AISHE के आंकड़े बताते हैं कि आज भी सबसे ज्यादा छात्र सरकारी विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं. वर्ष 2013-14 में सरकारी विश्वविद्यालयों में 51.9 लाख छात्र पढ़ रहे थे, जो कुल नामांकन का 81.3 प्रतिशत था. 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 73.9 लाख हो गई, लेकिन कुल हिस्सेदारी घटकर 68.1 प्रतिशत रह गई.

प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ने वालों की संख्या बढ़ी

दूसरी ओर निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में तेज उछाल आया है. वर्ष 2013-14 में इन संस्थानों में 11.9 लाख छात्र थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 34.6 लाख पहुंच गई. यानी निजी विश्वविद्यालयों में नामांकन लगभग तीन गुना बढ़ा और अब कुल विश्वविद्यालयी छात्रों में इनकी हिस्सेदारी करीब 32 प्रतिशत हो गई है.

यह भी पढ़ें – CUET स्कोर वालों के लिए बड़ी खबर, CUSB में UG एडमिशन शुरू; 16 जुलाई तक करें आवेदन

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *