गरीबी में बीता बचपन, पैसों की कमी ने तोड़ा क्रिकेटर बनने का सपना, फिर मुकेश छाबड़ा ऐसे बने बॉलीवुड के नंबर 1 कास्टिंग डायरेक्टर

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बॉलीवुड के जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर और फिल्ममेकर मुकेश छाबड़ा ने इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है. टैलेंट को सही मौके दिलाने के लिए मशहूर मुकेश छाबड़ा ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभाई है. कास्टिंग की दुनिया में उनका नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. मुकेश छाबड़ा 27 मई को अपना 46वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. आइए इस खास मौके पर उनकी स्ट्रगल स्टोरी और इंडस्ट्री में उनकी सक्सेस पर एक नजर डालते हैं. 

कितने पढ़े-लिखें हैं मुकेश छाबड़ा?
मुकेश छाबड़ा का जन्म 27 मई 1984 को दिल्ली में हुआ था. उन्होंने श्री राम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं. इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से जुड़ी थिएटर इन एजुकेशन (TIE) कंपनी के साथ करीब 6 साल तक एक्टिंग और टीचिंग का काम किया. 

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क्रिकेटर बनना चाहते थे मुकेश छाबड़ा
मुकेश छाबड़ा को बचपन से क्रिकेट का बहुत शौक था. वो क्रिकेटर ही बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था. पैसों की कमी के कारण उन्हें अपना ये ख्वाब छोड़ना पड़ा. दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मुझे क्रिकेट का बहुत शौक था. इसी फील्ड में फ्यूचल बनाना चाहता था, लेकिन इतने पैसे नहीं थे कि किसी अच्छी एकेडमी में एडमिशन ले सकूं. मुझे अपने ख्वाब की कुर्बानी देनी पड़ी. फिर मेरा रुझान थिएटर की तरफ हो गया. मैं कुछ वक्त में थिएटर से ऐसा जुड़ा कि आज तक खुद को उससे दूर नहीं कर पाया.’ 

गरीबी में बीता बचपन, पैसों की कमी ने तोड़ा क्रिकेटर बनने का सपना, फिर मुकेश छाबड़ा ऐसे बने बॉलीवुड के नंबर 1 कास्टिंग डायरेक्टर

50 रुपये लेकर मुंबई आए थे मुकेश छाबड़ा
मुकेश छाबड़ा की स्ट्रगल से लेकर सक्सेस तक की स्टोरी बेहद दिलचस्प है. दैनिक भास्कर के अनुसार, वो जब मुंबई आए थे तो उनकी जेब में सिर्फ 50 रुपये थे. वो अपने दोस्त धीरेंद्र द्विवेदी के घर रुके थे. शरुआती दिनों में धीरेंद्र द्विवेदी और आशुतोष नागपाल जैसे दोस्तों ने उनकी खूब मदद की. जब खाने के लिए पैसी नहीं रहते थे तो यहीं लोग उन्हें खाना खिलाते थे. आज उनकी गिनती बॉलीवुड के बड़े कास्टिंग डायरेक्टर्स में होती है. 

बैक डांसर के तौर पर किया काम
मुकेश छाबड़ा का पूरा बचपन गरीबी में बीता. जब वो 16 साल के थे, तब उन्होंने खुद के खर्च के लिए बतौर बैक डांस भी काम किया. दिल्ली के बड़े-बड़े होटलों में जब कोई सिंगर परफॉर्म करने आता था, तब वो बैक डांसर के तौर पर 11-12 लड़कों के साथ डांस करते थे. एक शो के बदले उन्हें 50 रुपये मिलते थे. मुकेश छाबड़ा ने पैसों की लालच में कुछ समय के लिए NDTV के शो ‘गुस्ताखी माफी है’ में भी काम किया, लेकिन क्रिएटिविटी ना होने के कारण उन्होंने ये जॉब 6 महीने में ही छोड़ दी. यहां उनकी सैलेरी 18 हजार रुपये थी.

इन डायरक्टर्स ने की मुकेश छाबड़ा की मदद
कुछ समय के संघर्ष के बाद मुकेश छाबड़ा ने कुछ फिल्मों में छोटी-मोटी कास्टिंग करनी शुरू कर दीं. नितेश तिवारी, इम्तिाज अली और अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स ने हर कदम में मुकेश का सपोर्ट किया और उन्हें काम दिलाने में मदद की. मुकेश छाबड़ा ने अपने करियर की शुरुआत 2006 में फिल्म ‘रंग दे बसंती’ से बतौर असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर की थी. इसके बाद 2012 में उन्होंने अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 2’ में एक छोटा सा कैमियो किया. 

मुकेश छाबड़ा ने की इन फिल्मों की कास्टिंग
साल 2015 में मुकेश छाबड़ा ने सलमान खान की फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ के लिए कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम किया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. मुकेश छाबड़ा ने ‘बॉम्बे वेलवेट’, ‘दंगल’, ‘लैला मजनू’, ‘लाल सिंह चड्ढा’, ‘जवान’, ‘डंकी’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में बतौर कास्टिंग डायरेक्टर काम किया है. मुकेश छाबड़ा ने फिल्म ‘दिल बेचारा’ का निर्देशन भी किया है. वो इस फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर भी थे. 

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‘रामायण’ को लेकर चर्चा में मुकेश छाबड़ा
मुकेश छाबड़ा इन दिनों फिल्म ‘रामायण’ को लेकर चर्चा में हैं. इस फिल्म की कास्टिंग में इन्होंने ही की है. फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं. वहीं, माता सीता के लिए साई पल्लवी को चुना गया है. फिल्म में रावण का रोल कन्नड़ सुपरस्टार यश को मिला है. ये फिल्म 2026 में दिवाली के खास मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

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