Lifestyle Inflation: जब सैलरी बढ़ती है, तो लोगों का पहला मन होता है कि अब लाइफस्टाइल को बेहतर बनाया जाए. इसके लिए लोग नया फोन खरीदते हैं, बड़ा घर खरीदते हैं, महंगी कार लेते हैं, विदेश घूमते हैं और ज्यादा से ज्यादा खर्च करते हैं. धीरे-धीरे ये शौक लोगों की जरूरत बन जाते हैं. इसे ही ‘लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन’ कहा जाता है.
बढ़ती जा रही समस्या
आज के समय में ये समस्या और बढ़ गई है क्योंकि सोशल मीडिया पर हर दिन लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाई देती है. लोग अब पड़ोसियों से नहीं, बल्कि इन्फ्लुएंसर्स, सेलिब्रिटीज और अमीर लोगों से तुलना करने लगे हैं. इससे महंगा खर्च करना सामान्य लगने लगता है. धीरे-धीरे महंगे मोबाइल, ब्रांडेड कपड़े, बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग और लग्जरी चीजें रोजमर्रा का हिस्सा बन जाती हैं. समस्या ये है कि एक बार बढ़ा खर्च बाद में कम करना मुश्किल होता है. नौकरी जाने या आर्थिक परेशानी के समय यही खर्च बोझ बन जाते हैं.
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20 साल बाद बढ़ सकता है खर्च
ऐसी लाइफस्टाइल आने वाले समय में आपका खर्च बढ़ा सकती है. जैसे मान लीजिए आज आपके परिवार का खर्च 50,000 रुपये महीना है. अगर महंगाई औसतन 6% साल के हिसाब से रही, तो 20 साल बाद यही खर्च लगभग 1.6 लाख रुपये महीना हो सकता है. यानी अगर आपकी लाइफस्टाइल नहीं भी बदले, तब भी महंगाई खर्च को कई गुना बढ़ा देती है. अगर हर कुछ साल में लाइफस्टाइल भी महंगी होती जाए, तो भविष्य की आर्थिक जरूरतें और ज्यादा बढ़ जाएंगी.
इसी वजह से कई लोग अच्छी कमाई के बावजूद पैसे बचा नहीं पाते. उनकी आय बढ़ती है, लेकिन खर्च उससे भी तेजी से बढ़ जाते हैं.
इन गलतियों को करने से बचें
अगर आप भी लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन के जाल से बचना चाहते हैं, तो कुछ गलतियांकरने से आपको बचना चाहिए. जैसे:
- हर बार सैलरी बढ़ने पर खर्च बढ़ाना
- सिर्फ दिखावे के लिए बड़ा घर या महंगी कार खरीदना
- हर चीज EMI पर लेना
- इमरजेंसी फंड न बनाना
- निवेश को टालते रहना
SIP है जरूरी
महंगाई और लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका SIP (Systematic Investment Plan) है. इससे धीरे-धीरे बड़ा फंड बनाया जा सकता है. अगर कोई 25 साल की उम्र में 10,000 रुपये महीने की SIP शुरू करे और हर साल उसे 10% बढ़ाए, तो 30 साल में करीब 8 करोड़ रुपये तक का फंड बन सकता है.
सबसे जरूरी बात
महंगाई को रोकना संभव नहीं है, लेकिन लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन को कंट्रोल किया जा सकता है. ज्यादा पैसा कमाना ही असली लक्ष्य नहीं होना चाहिए. असली लक्ष्य भविष्य को सुरक्षित रखना, आर्थिक आजादी और तनावमुक्त जीवन है. अच्छी कमाई आपकी लाइफस्टाइल बेहतर बनाती है, लेकिन अनुशासित निवेश आपका भविष्य सुरक्षित बनाता है.