Social Media Health Advice: क्या आप भी इन्फ्लुएंसर्स की सलाह पर खाते हैं दवाएं, जानें सेहत पर कितने भारी ऐसे हेल्थ टिप्स?

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Can You Trust Health Influencers On Social Media: आजकल सोशल मीडिया सिर्फ एंटरटेनमेंट का प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि लोग यहां स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह भी बड़ी संख्या में लेने लगे हैं. वजन कम करने से लेकर बेहतर नींद, ब्लड शुगर कंट्रोल, मेंटल हेल्थ और लंबी उम्र तक, हर समस्या का समाधान बताने वाले हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी हर सलाह पर भरोसा करना सुरक्षित है? डॉक्टर्स और रिसर्चर्स का मानना है कि बिना जांचे-परखे ऑनलाइन हेल्थ टिप्स को फॉलो करना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है. 

बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया के भरोसे

प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 50 साल से कम उम्र के करीब आधे लोग हेल्थ और वेलनेस से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स या पॉडकास्टर्स से लेते हैं. इस रिसर्च में लगभग 13 हजार ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स का एनालिसिस किया गया जिनके 1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. हैरानी की बात यह रही कि इनमें से पांच में से केवल एक व्यक्ति ही डॉक्टर, नर्स या मेडिकल प्रोफेशनल था. बाकी लोग खुद को लाइफ कोच, डाइट कोच, एंटरप्रेन्योर या पैरेंट के तौर पर पेश कर रहे थे. 

क्यों लोग बड़ी संख्या में इसको फॉलो कर रहे हैं?

यूएस के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में डिजिटल वेलनेस कम्युनिटी पर रिसर्च करने वाली मारिया वेलमैन कहती हैं कि लोग अब सिर्फ फैशन या लाइफस्टाइल ही नहीं, बल्कि अपने शरीर और स्वास्थ्य से जुड़े फैसले भी सोशल मीडिया से प्रभावित होकर लेने लगे हैं. वहीं वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की हेल्थ मिसइन्फॉर्मेशन रिसर्चर  रेचल मोरान  के मुताबिक, कई लोग पारंपरिक मेडिकल सिस्टम पर भरोसा कम कर रहे हैं और इसी वजह से वे ऐसे इन्फ्लुएंसर्स की तरफ आकर्षित होते हैं जो खुद को सामान्य लोगों जैसा दिखाते हैं.

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क्यों सोशल मीडिया की जानकारी काम नहीं आती?

एक्सपर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर गलत हेल्थ जानकारी तेजी से फैलती है क्योंकि लोग निजी अनुभवों से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं. अगर कोई इन्फ्लुएंसर अपनी वेट लॉस जर्नी, कैंसर से लड़ाई या किसी बीमारी के अनुभव को साझा करता है, तो लोग उसे आसानी से सच मान लेते हैं. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि किसी एक व्यक्ति का अनुभव हर किसी पर लागू नहीं हो सकता.

नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी ऑफ मिसइनफॉर्मेशन लैब की डायरेक्टर ब्रायोनी स्वायर-थॉम्पसन बताती हैं कि कई लोग मुनाफे के लिए गलत स्वास्थ्य जानकारी फैलाते हैं और फिर उससे जुड़े प्रोडक्ट्स या कोर्स बेचते हैं. कुछ फर्जी दावों में कैंसर का घरेलू इलाज, बिना साइंटफिक प्रमाण वाले सप्लीमेंट्स और चमत्कारी इलाज शामिल होते हैं.

आपको क्या करना चाहिए?

डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर हेल्थ टिप पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच जरूर करें. देखें कि सलाह देने वाले व्यक्ति के पास मेडिकल डिग्री है या नहीं, क्या उसकी बात साइंटफिक रिसर्च पर आधारित है और क्या वह किसी प्रोडक्ट को बेचकर फायदा कमा रहा है. एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि सही जानकारी के लिए भरोसेमंद सोर्स को प्राथमिकता देनी चाहिए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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