- NTA ने करोड़ों की कमाई के बावजूद व्यवस्थाओं को चरमराया.
Neet UG Re-Exam 2026: देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों छात्र अपनी आंखों में बड़े-बड़े सपने संजोए साल-दर-साल परीक्षाओं की तैयारी में अपना दिन-रात एक कर देते हैं. उनके माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा जोड़कर, तंगहाली में भी अपने बच्चों को बड़े शहरों में कोचिंग और परीक्षाओं के लिए भेजते हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली में बैठे कुछ भ्रष्ट लोगों और सॉल्वर गैंग के चेहरों पर इन बच्चों की मासूम मेहनत और उनके अभिभावकों के खून-पसीने की कमाई को देखकर जरा भी तरस नहीं आता. हाल ही में लीक हुए नीट के पेपर के बाद NTA पर जमकर सवाल उठाए जा रहे हैं. लेकिन यह कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले भी इस एजेंसी पर ऐसे आरोप लगे हैं, चलिए विस्तार से इस रिपोर्ट में जानते हैं.
दोबारा परीक्षा के लिए अब वायुसेना का सहारा
नीट-यूजी परीक्षा में लगातार सामने आए पेपर लीक विवादों के बाद केंद्र सरकार अब परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए बड़े और अभूतपूर्व कदम उठाने जा रही है. भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और उनकी गोपनीय ढुलाई में किसी भी तरह की सेंधमारी को रोकने के लिए सरकार भारतीय वायुसेना (IAF) की मदद लेने की पूरी तैयारी में है. इस नई और सख्त योजना का मुख्य उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी बेहद संवेदनशील सामग्रियों और प्रश्नपत्रों को पूरी सुरक्षा के साथ तय समय पर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना है, ताकि देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं की साख और विश्वसनीयता को फिर से बहाल किया जा सके.
परीक्षा आयोजनों में आई भारी गिरावट
देश की सबसे बड़ी परीक्षा नियामक संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के काम करने की रफ्तार और क्षमता में पिछले कुछ वर्षों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. वित्तीय वर्ष 2024 के दौरान एनटीए केवल 29 परीक्षाओं का ही सफल संचालन कर सकी, जो कि साल 2019 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर माना जा रहा है. देश की इतनी बड़ी और अत्याधुनिक संस्था के प्रदर्शन में आई यह अप्रत्याशित गिरावट लगातार हो रहे पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों, प्रशासनिक विफलता और परीक्षाओं के बार-बार टाले जाने का ही सीधा परिणाम है, जिसने एजेंसी की साख पर बड़े सवाल खड़े किए हैं.
जब संसद में खुली बदइंतजामी की पोल
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 के मुकाबले साल 2024 में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की संख्या घटकर आधे से भी कम रह गई है. जहां एक तरफ साल 2023 में NTA ने रिकॉर्ड 66 परीक्षाओं का सफल आयोजन किया था, वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा सिमटकर केवल 29 पर सिमट गया. परीक्षाओं की संख्या घटने के साथ-साथ इस एजेंसी के तहत पंजीकृत होने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी बहुत बड़ी कमी देखी गई है, जो कि एजेंसी के प्रति छात्रों के गिरते भरोसे को साफ बयां करता है.
छात्र पंजीकरण के आंकड़ों में भारी गिरावट
आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2023 में एनटीए के पास विभिन्न परीक्षाओं के लिए कुल 1,33,51,541 (1.33 करोड़ से अधिक) छात्रों ने अपना पंजीकरण कराया था. लेकिन साल 2024 में यह संख्या बहुत तेजी से नीचे गिरी और घटकर केवल 85,78,005 (85.78 लाख से अधिक) रह गई. छात्रों की संख्या में आई यह भारी कमी यह दर्शाती है कि परीक्षाओं के टलने और लीक होने की खबरों ने छात्रों के मनोबल को बुरी तरह तोड़ दिया है. 2024 के ये आंकड़े एनटीए के वर्तमान विकास के दावों के विपरीत इसे इसके शुरुआती सालों की याद दिलाने वाले स्तर पर ले जाकर खड़ा कर चुके हैं.
पिछले छह वर्षों का पूरा लेखा-जोखा
अगर हम पिछले छह सालों में एनटीए के परीक्षा कराने के पूरे सफरनामे और चार्ट के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उतार-चढ़ाव की एक साफ तस्वीर दिखाई देती है कि वर्ष 2017 में स्थापना के बाद से एनटीए ने मेडिकल के लिए नीट (NEET), इंजीनियरिंग के लिए जेईई मेन (JEE Main) और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए सीयूईटी (CUET) जैसी बेहद बड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली थी. साल 2019 में केवल 23 परीक्षाओं से शुरुआत करने के बाद एजेंसी ने तेजी से काम बढ़ाया और साल 2020 में 35, साल 2021 में 45 और साल 2022 में 44 परीक्षाओं का आयोजन किया. साल 2023 इसका स्वर्ण काल था जब इसने 66 परीक्षाएं कराईं, लेकिन साल 2024 में यह व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई.
परीक्षाओं के आयोजन के पुराने तौर-तरीके
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ था कि साल 2024 में आधुनिक तकनीक का दम भरने वाली एनटीए ने अपनी 29 परीक्षाओं में से केवल 12 परीक्षाएं ही पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराईं. इसके अलावा, 4 परीक्षाएं हाइब्रिड मॉडल (CBT और पेन-पेपर दोनों का मिश्रण) पर हुईं, जबकि 3 परीक्षाएं पूरी तरह से पारंपरिक पेन और पेपर मोड पर आयोजित की गईं. शेष परीक्षाओं में 7 परीक्षाएं लिखित और इंटरव्यू के आधार पर, 2 परीक्षाएं इंग्लिश शॉर्टहैंड टेस्ट और 1 परीक्षा रिमोट-प्रोटेक्टेड मोड के जरिए ली गई. सीयूईटी यूजी जैसी बड़ी परीक्षा को भी हाइब्रिड मोड में कराना पड़ा था.
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विवादों के भंवर में फंसी NTA
साल 2024 में परीक्षाओं की संख्या में आई इस भारी गिरावट की सबसे मुख्य वजह एनटीए के कुप्रबंधन और विवादों का भंवर ही रही है. कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट फॉर पोस्टग्रेजुएट (CUET PG) और यूजीसी नेट (UGC NET) जैसी देश की बेहद प्रतिष्ठित और बड़ी राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षाओं को पेपर लीक की आशंकाओं और गंभीर तकनीकी गड़बड़ियों के कारण या तो ऐन वक्त पर टालना पड़ा या फिर उन्हें पूरी तरह से रद्द करना पड़ा. इन लगातार प्रशासनिक चूकों ने देश के शिक्षा तंत्र और एनटीए की पूरी कार्यप्रणाली को चौतरफा आलोचनाओं के घेरे में ला दिया.
2024 तक 15 बार टलीं परीक्षाएं
साल 2024 में संसद के सत्र के दौरान शिक्षा मंत्रालय ने खुद यह स्वीकार किया था कि अपनी स्थापना के बाद से लेकर उस वक्त तक एनटीए ने कुल 15 बार अलग-अलग बड़ी परीक्षाओं को स्थगित या रद्द किया है. हालांकि, इनमें से अधिकांश परीक्षाएं वैश्विक कोरोना महामारी (COVID-19) के दौर में सुरक्षा कारणों से टाली गई थीं, लेकिन हाल के वर्षों में परीक्षाओं का टाला जाना पूरी तरह से प्रशासनिक विफलताओं, सर्वर की तकनीकी खामियों और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के दावों के पूरी तरह फेल हो जाने की वजह से हुआ है, जिसका सीधा खामियाजा निर्दोष छात्रों को भुगतना पड़ा है.
भारी-भरकम मुनाफा बनाम बदहाल व्यवस्था
एक तरफ जहां पिछले छह वर्षों के भीतर एनटीए ने देश के करोड़ों छात्रों से परीक्षा फीस के रूप में 448 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम मुनाफा कमाया है, वहीं दूसरी तरफ देश के युवाओं की झोली में सिर्फ परीक्षाओं का कैंसिलेशन, मानसिक तनाव, तकनीकी गड़बड़ियां और अदालतों के चक्कर काटने की लाचारी आई है. वर्ष 2020 से लेकर 2026 के बीच एनटीए के जरिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं का रिकॉर्ड खंगाला जाए, तो ऐसी 12 प्रमुख परीक्षाएं सामने आती हैं जो पेपर लीक, हैकिंग, मार्क्स स्कैम या गंभीर प्रशासनिक विफलता के कारण पूरी तरह से कलंकित हो चुकी हैं.
नीट-यूजी 2026 की ऐतिहासिक विफलता
एनटीए के इतिहास का सबसे काला अध्याय 3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट-यूजी (NEET-UG 2026) परीक्षा के साथ लिखा गया. इस परीक्षा को व्यापक पैमाने पर हुई धांधली के बाद 12 मई को पूरी तरह रद्द घोषित कर दिया गया था. जांच एजेंसियों की तफ्तीश में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि परीक्षा के आयोजन से पूरे 15 दिन पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम के गुप्त ग्रुपों में जो ‘गेस पेपर’ बिक रहा था, वह एनटीए के असली प्रश्नपत्र से 100 से ज्यादा सवालों में अक्षरशः मैच कर रहा था. इस देशव्यापी घोटाले की जांच वर्तमान में सीबीआई (CBI) के हाथों में है.
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नीट-यूजी 2024 का देशव्यापी घोटाला
साल 2024 में भी नीट परीक्षा का रिजल्ट आते ही पूरे देश में भारी बवाल मच गया था, जब एक साथ 67 छात्रों को पूरे 720 में से 720 अंक मिल गए थे. बिहार, गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों से पेपर लीक होने के पुख्ता और अकाट्य सुराग मिले थे. पटना पुलिस ने सॉल्वर गैंग के कई गुर्गों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था और हजारीबाग के एक स्कूल के पास से जले हुए प्रश्नपत्रों के टुकड़े बरामद हुए थे. यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने भी माना कि परीक्षा की शुचिता और पवित्रता पूरी तरह प्रभावित हुई थी.
जब डार्कनेट पर बिका यूजीसी-नेट का पेपर
जून 2024 में आयोजित होने के तुरंत बाद देश के प्रोफेसर और रिसर्चर बनाने वाली राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी यूजीसी-नेट 2024 (UGC-NET) को गृह मंत्रालय (MHA) के एक बेहद गोपनीय और पुख्ता इनपुट के बाद आनन-फानन में रद्द कर दिया गया था. जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया था कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही इस परीक्षा का पूरा प्रश्नपत्र इंटरनेट के सबसे खतरनाक और छिपे हुए हिस्से ‘डार्कनेट’ पर धड़ल्ले से लीक और भारी कीमतों पर बेचा जा चुका था, जिससे परीक्षा की पूरी गोपनीयता तार-तार हो गई थी.
रूसी हैकरों की मदद से जेईई मेन 2021 हैक
देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2021 (JEE Main) भी एनटीए की लापरवाही के कारण सुरक्षित नहीं रह सकी. सीबीआई की जांच में एक बेहद हाई-टेक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑनलाइन घोटाले का पर्दाफाश हुआ था. इस जांच में सामने आया कि एक निजी कोचिंग कंसल्टेंसी फर्म ने रूसी हैकरों की मदद लेकर परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटरों का ‘रिमोट एक्सेस’ हासिल कर लिया था. इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे सॉल्वर छात्रों के कंप्यूटर को खुद ऑपरेट करके पेपर सॉल्व कर रहे थे और उन्हें अवैध तरीके से पास करा रहे थे.
2020 में असम का बहुचर्चित टॉपर घोटाला
साल 2020 में आयोजित जेईई मेन परीक्षा के दौरान असम राज्य से एक बेहद हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया था. वहां के राज्य टॉपर नील नक्षत्र दास ने खुद परीक्षा हॉल में बैठकर परीक्षा देने के बजाय अपने स्थान पर एक डमी कैंडिडेट (प्रॉक्सी) को परीक्षा देने के लिए परीक्षा केंद्र के भीतर बिठा दिया था और इस धांधली के दम पर उसने 99.8 परसेंटाइल का भारी स्कोर हासिल कर लिया था. बाद में शिकायत दर्ज होने पर पुलिस ने इस पूरे रैकेट में शामिल कोचिंग संचालक, छात्र के पिता और परीक्षा केंद्र के इनविजीलेटर समेत कई लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा था.
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स्कोरकार्ड की घातक विसंगतियां और निर्दोष छात्रों की आत्महत्याएं
साल 2020 की नीट-यूजी परीक्षा के दौरान एनटीए की तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण कुछ बेहद दुखद और गंभीर घटनाएं भी सामने आईं. मध्य प्रदेश की एक होनहार छात्रा विधि सूर्यवंशी को एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी रिजल्ट में केवल 6 अंक थमा दिए गए थे, जिससे गहरे मानसिक अवसाद में जाकर उस छात्रा ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया. बाद में जब कोर्ट के आदेश पर उसकी मूल ओएमआर (OMR) शीट की जांच की गई, तो पता चला कि उसके वास्तव में 590 अंक थे. इसी तरह मृदुल रावत नाम के एक अन्य छात्र को पहले फेल घोषित किया गया, लेकिन दोबारा जांच में वह एसटी कैटेगरी का ऑल इंडिया टॉपर निकला.
सॉफ्टवेयर ग्लिच से खराब हुआ छात्रों का भविष्य
साल 2022 की जेईई मेन परीक्षा पूरी तरह से सॉफ्टवेयर की खामियों और तकनीकी खराबी का शिकार होकर रह गई थी. देश के दर्जनों परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर स्क्रीन बार-बार हैंग हो रही थी और परीक्षा के बाद जारी हुई रिस्पॉन्स शीट तथा ऑफिशियल आंसर की के बीच बड़े पैमाने पर मिसमैच पाया गया था. इस तकनीकी अराजकता के कारण हजारों मेधावी छात्रों के परसेंटाइल अचानक बहुत नीचे गिर गए. छात्रों और अभिभावकों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बावजूद एनटीए ने अपनी गलती मानने और दोबारा परीक्षा आयोजित करने से पूरी तरह साफ मना कर दिया था.
छात्रों के असमान वितरण का अन्याय
साल 2024 के जेईई मेन के जनवरी सत्र (सेशन 1) के दौरान एनटीए की एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना प्रशासनिक चूक सामने आई. परीक्षा के लिए अलग-अलग पालियों (Shifts) में छात्रों का जो बंटवारा किया गया था, वह पूरी तरह से असमान था. 27 और 29 जनवरी की शुरुआती शिफ्टों में देश के क्षमता से कहीं ज्यादा छात्रों को एक साथ अलॉट कर दिया गया, जिसके कारण नॉर्मलाइजेशन की जटिल प्रक्रिया में भारी विसंगतियां पैदा हो गईं. इसका नतीजा यह हुआ कि उन पारियों के छात्रों के लिए कट-ऑफ अप्रत्याशित रूप से बहुत ऊपर चली गई और अच्छे अंक पाकर भी छात्र दौड़ से बाहर हो गए.
हाई-टेक फर्जीवाड़ा और इंपर्सनेशन के मामले
जेईई मेन 2024 के अप्रैल सत्र (सेशन 2) के दौरान देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू होने के दावों के बावजूद बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया. दिल्ली-एनसीआर के नोएडा समेत देश के कई बड़े शहरों के परीक्षा केंद्रों से दूसरों के नाम पर परीक्षा देने और हाई-टेक गैजेट्स के जरिए नकल करने के कई मामले पकड़े गए. इस व्यापक स्तर पर हुई धांधली की पुष्टि होने के बाद खुद एनटीए को मजबूरन 39 उम्मीदवारों को अगले तीन सालों के लिए परीक्षा में बैठने से पूरी तरह प्रतिबंधित करना पड़ा था.
सीयूईटी के पहले सत्र का डरावना सपना
साल 2022 में जब देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए पहली बार कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) को अनिवार्य रूप से लागू किया गया, तो एनटीए की पूरी तैयारी पहली ही परीक्षा में ध्वस्त हो गई. परीक्षा के दौरान सर्वर का बार-बार क्रैश होना, छात्रों को बताए बिना अंतिम समय पर परीक्षा केंद्रों का बदल जाना और कंप्यूटर स्क्रीन का लगातार हैंग होना एक दैनिक समस्या बन गई थी. इस तकनीकी खराबी के कारण देश के दर्जनों केंद्रों पर परीक्षाएं कई-कई दिनों के लिए टालनी पड़ीं, जिससे देश के लाखों छात्र और उनके अभिभावक मानसिक रूप से बेहद परेशान हुए थे.
विशेषज्ञों की योग्यता पर उठे गंभीर सवाल
साल 2024 में आयोजित सीयूईटी-यूजी परीक्षा के बाद जब एनटीए ने अपनी प्रोविजनल आंसर-की जारी की, तो देश के शिक्षा जगत में एक नया विवाद खड़ा हो गया. इतिहास, राजनीति विज्ञान और विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रश्नपत्रों में दर्जनों सवालों के आधिकारिक जवाब पूरी तरह से गलत दिए गए थे. एनटीए की इस घोर लापरवाही को सुधारने के लिए छात्रों को प्रति प्रश्न 200 रुपये की भारी फीस देकर ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज करानी पड़ीं. इस पूरे घटनाक्रम ने एनटीए के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले तथाकथित विषय विशेषज्ञों. की शैक्षणिक योग्यता और उनकी गंभीरता पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए.
2024 में ऐन वक्त पर नीट-पीजी परीक्षा का टलना
देश में मचे नीट-यूजी और यूजीसी-नेट के भारी विवादों और राजनीतिक दबाव के ठीक बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय और एनटीए ने सुरक्षा और एहतियात का हवाला देते हुए नीट-पीजी 2024 की परीक्षा को उसके निर्धारित समय से मात्र कुछ घंटे पहले आधी रात को अचानक स्थगित करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया था. इस अचानक लिए गए फैसले के कारण देश के दूर-दराज के इलाकों से महंगी टिकटें लेकर, होटलों में रुककर परीक्षा केंद्रों तक पहुंच चुके हजारों युवा डॉक्टरों को भारी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था.
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