Bank Deal: पिछले कई दिनों से सरकार IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर प्लानिंग कर रही थी. लेकिन अब ये प्लानिंग जल्दी ही पूरी होने वाली है. कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय मूल के अरबपति प्रेम वत्स जल्दी ही इस बैंक के आधिकारिक रूप से मालिक बन सकते हैं. क्योंकि इस बैंक को खरीदने के लिए उन्होंने सबसे बड़ा प्रपोजल सरकार के सरकार के सामने रखा है.
कंपनी ने सामने रखा प्रपोजल
दरअसल भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स IDBI को खरीदने के लिए काफी दिलचस्पी दिखा रही है. कंपनी की तरफ से बैंक को खरीदने के लिए 5.5 बिलियन से 5.7 बिलियन डॉलर (करीब 47,000-49,000 करोड़ रुपये) का प्रपोजल रखा है.
ये भारत के बैंकिंग सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक होगा. हालांकि, सरकार ने अभी इस पर आखिरी फैसला नहीं लिया है और फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है.
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क्यों किया जा रहा है बैंक का सदा?
IDBI एक निजी क्षेत्र बैंक है जिसकी 60.7% हिस्सेदारी सरकार और LIC के पास है. जिसे वो बेचना चाहते हैं. फिलहाल सरकार के पास बैंक की करीब 45.5% और LIC के पास 49.2% हिस्सेदारी है. ये फैसला इसलिए लिया जा रहा है कि कुछ साल पहले IDBI बैंक खराब कर्ज (NPA) और कमजोर वित्तीय स्थिति से जूझ रहा था. 2018 में RBI ने बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) ढांचे में भी रखा था.
हालांकि अब बैंक ने खराब कर्ज कम किया, मुनाफा बढ़ाया और अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया है. जिसकी वजह से वैश्विक निवेशक इसमें निवेश करने के लिए तैयार हैं. बैंक के लिए दो कंपनियों फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई की एमिरेट्स NBD ने दाव खेला है.
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
अगर फेयरफैक्स बैंक की हिस्सेदारी खरीद भी लेती है, तो आम ग्राहकों के लिए तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. बैंक की शाखाएं, जमा राशि, लोन और अन्य बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह ही जारी रहेंगी. फिलहाल सरकार दोनों कंपनियों की बोलियों की समीक्षा कर रही है और आखिरी मंजूरी मिलने के बाद ही इस सौदे पर फैसला होगा.
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