स्कूलों में जल्द शुरू हो सकती है कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन, जानिए क्या है CSE और बच्चों को क्या पढ़ाया जाएगा

1813928295d2bfa6ebe0bd5f2ce6eb8217840268084701294 original


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • इसमें शरीर, रिश्ते, सहमति और प्रजनन स्वास्थ्य की जानकारी होगी.

देश के स्कूलों में जल्द कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इस संबंध में तैयारी चल रही है. यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अदालत ने किशोरों के अधिकार, उनकी निजता और पॉक्सो कानून के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों के राइट टू प्राइवेसी और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों पर खुद संज्ञान लिया था. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि 15 से 18 वर्ष की उम्र जीवन का बेहद संवेदनशील दौर होता है. इस उम्र में बच्चे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरते हैं, लेकिन सही जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में कई बार ऐसे फैसले ले लेते हैं, जिनका असर उनके पूरे भविष्य पर पड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन कई मामलों में इसका इस्तेमाल किशोरों के आपसी सहमति वाले रिश्तों में भी होने लगा है. अक्सर जब नाबालिग लड़का और लड़की घर से भाग जाते हैं या परिवार की मर्जी के खिलाफ रिश्ता बना लेते हैं, तो परिजन लड़के पर पॉक्सो का मामला दर्ज करा देते हैं. ऐसे मामलों में नाबालिग लड़कों को जेल तक जाना पड़ता है और उनका भविष्य प्रभावित होता है. अदालत का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों को केवल कानून से नहीं, बल्कि सही समय पर सही शिक्षा देकर भी काफी हद तक रोका जा सकता है.

इसी दिशा में केंद्र सरकार ने 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया. इस समिति की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने की. इसमें टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, शिक्षा विशेषज्ञ और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया. समिति को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह किशोरों को जागरूक बनाने और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करे. समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी पेश किया गया है.

यह भी पढ़ें – देश के किस राज्य में जूनियर डॉक्टर को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी? देखें सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की पूरी डिटेल

CSE क्या है?

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन (CSE) है क्या? विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल सेक्स से जुड़ी जानकारी देने वाला पाठ्यक्रम नहीं है, बल्कि बच्चों और किशोरों को उनकी उम्र के अनुसार वैज्ञानिक, सही और जिम्मेदार जानकारी देने की एक शैक्षणिक प्रक्रिया है. इसका उद्देश्य युवाओं को अपने शरीर, भावनाओं, रिश्तों और अधिकारों को बेहतर ढंग से समझने के लिए तैयार करना है.

क्या-क्या पढ़ाया जा सकता है?

रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें किशोरावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों की जानकारी दी जाएगी. लड़के और लड़कियों को प्यूबर्टी, मासिक धर्म, प्रजनन स्वास्थ्य, गर्भावस्था, गर्भनिरोधक उपायों और यौन संचारित संक्रमण (STI) जैसी जरूरी बातों के बारे में वैज्ञानिक तरीके से समझाया जाएगा, ताकि वे भ्रम और गलत जानकारी से बच सकें.

इसके अलावा बच्चों को रिश्तों की अहमियत, स्वस्थ संवाद और भावनात्मक समझ भी सिखाई जाएगी. उन्हें बताया जाएगा कि दोस्ती, आकर्षण, प्यार और रिश्तों में सम्मान तथा विश्वास कितना जरूरी है. साथ ही ‘सहमति’ (Consent) का महत्व भी समझाया जाएगा, ताकि वे किसी भी रिश्ते में अपनी और दूसरों की इच्छा का सम्मान करना सीख सकें.

यह भी पढ़ें – चीन में रोबोट्स की वजह से बढ़ी बेरोजगारी, जानें किन सेक्टरों में छिन रहीं नौकरियां?

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *