Petrol Diesel News: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध एक बार फिर से शुरू हो गया है. जिसके कारण एक बार फिर से लोगों के मन में डर बैठ गया है कि क्या दोबारा महंगाई बढ़ेगी? होर्मुज पर एक बार फिर से युद्ध के कारण संकट की स्थिति है जिसकी वजह से लग रहा है कि अब दोबारा पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ेंगी. हालांकि फिलहाल सरकार की तरफ से ऐसा कुछ कहा नहीं गया है. लेकिन फिर भी एक बार समझते हैं कि सरकार ऐसी संकट की स्थिति में क्या कर सकती है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
मार्च और अप्रैल के महीने में कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी हुई थी. जिसकी वजह से मई में सरकार को पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा करना पड़ा था. जिससे आम जनता काफी परेशान हुई थी. तो वहीं अब एक बार फिर से स्थिति वैसी ही है. क्योंकि ईरान- अमेरिका का युद्ध शुरू हो गया है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर से बढ़ गई हैं. आज यानी मंगलवार को ब्रेंट क्रूड ऑइल की कीमत करीब 86 रुपये डॉलर प्रति बैरेल हो गई है.
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सरकार के पास हैं दो रास्ते
सरकार के पास फिलहाल की स्थिति में दो रास्ते हैं या तो वो पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाकर जनता पर इसका सारा बोझ डाल दे, या फिर टैक्स घटाकर सारा बोझ खुद के ऊपर ले ले. हालांकि फिलहाल सरकार ने ऐसी कोई बात नहीं की है लेकिन फिर भी जनता के मन में लगातार कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से अच्छा- खासा तनाव है.
तेल कंपनियों पर भी है दबाव
जनता से भी ज्यादा दबाव में इस समय यदि कोई है तो वो हैं तेल कंपनियां, क्योंकि तेल महंगा होने का सबसे बड़ा असर सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ता है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) – भारत पेट्रोलियम कंपनी लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसे सरकारी कंपनियां कई बार राजनीतिक और सामाजिक कारणों से तुरंत कीमतें नहीं बढ़ा पाते. जिसका दबाव उनके ऊपर पड़ता है और कंपनियां घाटे में जाती हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक इन कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी. इसका मतलब है कि कंपनियां लंबे समय तक लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचती रहीं. अब अगर एक बार फिर से वैसी ही स्थिति बनती है तो दोबारा तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा.
मई में बढ़ी थीं कीमतें
ईरान- यूएस के बीच का युद्ध फरवी से चल रहा था, लेकिन सरकार ने अप्रैल तक टैक्स कम किया और लोगों के ऊपर कीमतें बढ़ने का दबाव नहीं आने दिया. लेकिन जब सरकार और तेल कंपनियों पर ज्यादा दबाव बढ़ा तब सरकार ने पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया. मई के महीने में 4 बार पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ. यदि एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतें 100 रुपये डॉलर प्रति बैरल के पार होती हैं तो एर बार फिर से सरकारी और तेल कंपनियां दबाव में आ जाएंगी. तब सरकार के पास यही दो विकल्प रह जाएंगे. अब देखना होगा कि सरकार पहले ही जनता पर बोझ डालती है या कुछ समय स्थित को संभालती है.