- महंगा तेल, कमजोर रुपया आम लोगों का खर्च बढ़ाएगा।
Currency Update: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की जेब पर भी दिखने लगा है. गुरुवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 96.2475 पर खुला. यह मई में बने अपने सबसे निचले स्तर 96.96 के बेहद करीब पहुंच गया है. इस महीने अब तक रुपया करीब 1.7% कमजोर हो चुका है.
रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. डर इस बात का है कि अगर हालात और बिगड़े तो होर्मुज से तेल की सप्लाई और ज़्यादा प्रभावित हो सकती है. दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल भेजता है. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है इसलिए तेल महंगा होते ही डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ने लगता है.
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तनाव बढ़ने से बाजार क्यों घबराया?
बुधवार को अमेरिका ने ईरान के तटीय रक्षा और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया. इसके बाद ईरान ने ऊर्जा निर्यात और घटाने की चेतावनी दी. ऐसे में दुनिया को डर है कि तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से निवेशकों ने सुरक्षित मानी जाने वाली अमेरिकी डॉलर की ओर रुख किया जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया.
RBI की कोशिशों का असर क्यों नहीं दिख रहा?
कुछ हफ्ते पहले जब कच्चा तेल सस्ता हुआ था तब रिजर्व बैंक ने डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए थे. इससे उम्मीद थी कि रुपया मजबूत होगा लेकिन अब तेल फिर महंगा हो गया है. बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने से RBI के उन कदमों का असर कमजोर पड़ गया है.
आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?
- कमजोर रुपया और महंगा तेल, दोनों मिलकर आम लोगों का खर्च बढ़ा सकते हैं.
- पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं.
- हवाई ईंधन महंगा होने से फ्लाइट टिकट महंगे पड़ सकते हैं.
- मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे आयातित सामान की कीमत बढ़ सकती है.
- विदेश में पढ़ाई और विदेश यात्रा का खर्च बढ़ सकता है.
- खाने-पीने की कई आयातित चीजें भी महंगी हो सकती हैं.
अगर तेल और रुपया दोनों पर दबाव लंबे समय तक बना रहा तो महंगाई बढ़ सकती है. ऐसे में RBI के लिए ब्याज दरें घटाना भी मुश्किल हो सकता है जिससे लोन और EMI पर असर पड़ सकता है.
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आगे क्या होगा?
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर है. अगर तनाव बढ़ता है तो कच्चा तेल और महंगा हो सकता है और रुपये पर दबाव बना रह सकता है. अगर रुपया 96.96 के स्तर से भी नीचे चला गया तो यह डॉलर के मुकाबले अब तक का सबसे कमजोर स्तर होगा.