Social Media Effects: सोशल मीडिया से ब्रेक लेते ही बच्चों की नींद और पढ़ाई में दिखा बड़ा सुधार, रिसर्च में बड़ा दावा

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Social Media Effects: आज के समय में सोशल मीडिया बच्चों की डेली लाइफ का बड़ा हिस्सा बन चुका है. पढ़ाई के बीच, दोस्तों से बातचीत, मनोरंजन और खाली समय का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन पर बीतता है. लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर लंबे समय से यह चिंता जताई जा रही है कि इसका असर बच्चों की नींद, पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और डेली की आदतों पर पड़ रहा है.

इसी बीच ब्रिटेन सरकार के सपोर्ट से हुई एक नई स्टडी ने इस बहस को और मजबूत कर दिया है. इस रिसर्च में पाया गया कि जिन बच्चों ने कुछ समय के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम किया या उस पर रोक लगाई, उनकी नींद बेहतर हुई, पढ़ाई में ध्यान बढ़ा और उनके ओवरऑल वेलबीइंग में भी सुधार देखने को मिला. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस रिसर्च में क्या-क्या सामने आया.

क्या कहती है नई UK स्टडी?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्टडी ब्रिटेन सरकार के सपोर्ट से कराई गई. इसमें 13 से 17 साल की उम्र के किशोरों वाले 309 परिवारों को शामिल किया गया. रिसर्च का उद्देश्य यह समझना था कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करने के अलग-अलग तरीके बच्चों की रूटीन और मानसिक स्थिति पर कितना असर डालते हैं. 

इस रिसर्च में क्या-क्या सामने आया?

रिसर्च के दौरान बच्चों को तीन अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया और एक महीने तक अलग-अलग नियमों का पालन कराया गया. जिसमें पहले ग्रुप को हर सोशल मीडिया ऐप इस्तेमाल करने के लिए रोज केवल 15 मिनट का समय दिया गया. वहीं दूसरे ग्रुप में रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक सोशल मीडिया कर्फ्यू लगाया गया, इस दौरान किसी भी सोशल मीडिया ऐप का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था और तीसरे ग्रूप ने पूरे एक महीने के लिए अपने फोन से सोशल मीडिया ऐप्स हटा दिए. रिसर्च में शामिल कई बच्चों ने बताया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम होने के बाद उन्हें पहले से बेहतर नींद आने लगी. पढ़ाई पर ध्यान लगाना आसान हो गया और उनका मूड भी पहले से बेहतर महसूस हुआ. कई प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि अब वे परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने लगे.

सबसे ज्यादा फायदा किस तरीके से मिला?

रिसर्च के मुताबिक, रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक सोशल मीडिया कर्फ्यू सबसे प्रभावी तरीका साबित हुआ. इससे बच्चों की नींद में लगातार सुधार देखने को मिला और परिवारों के लिए भी इस नियम का पालन करना आसान रहा. स्टडी में पाया गया कि जिन बच्चों ने अपने फोन से पूरी तरह सोशल मीडिया ऐप्स हटा दिए, उनमें पढ़ाई के दौरान ध्यान लगाने की क्षमता सबसे ज्यादा बढ़ी. हालांकि इस तरीके से कुछ नई चुनौतियां भी सामने आईं.

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सोशल मीडिया पूरी तरह बंद करने पर क्या परेशानी आई?

रिसर्च में शामिल कई बच्चों ने बताया कि सोशल मीडिया ऐप्स हटाने के बाद उन्हें दोस्तों से जुड़ाव कम महसूस हुआ. खासकर जिनके दोस्त मुख्य रूप से Snapchat जैसे ऐप्स के जरिए बातचीत करते थे, उन्हें खुद को ग्रुप से अलग महसूस होने लगा. स्टडी में यह भी सामने आया कि हर दिन केवल 15 मिनट की समय सीमा तय करना सबसे कम सफल तरीका रहा. कई बच्चों ने कहा कि बातचीत और ग्रुप चैट के बीच बार-बार समय सीमा खत्म होने से यह नियम सही नहीं लगा. कुछ बच्चों ने टैबलेट, पुराने स्मार्टफोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करके इन सीमाओं को भी पार कर लिया.

उम्र के आधार पर नियमों पर क्या राय रही?

रिसर्च में शामिल कई किशोरों ने उम्र के आधार पर सोशल मीडिया नियम बनाने का सपोर्ट किया. हालांकि उनका मानना था कि ज्यादा उम्र के बच्चों को उनकी समझ और जिम्मेदारी के अनुसार कुछ ज्यादा आजादी मिलनी चाहिए. रिसर्च में यह भी कहा गया कि अगर सिर्फ उम्र के आधार पर सोशल मीडिया पर रोक लगाई जाती है, तो कुछ लोग VPN या गलत उम्र दर्ज करके इन नियमों से बचने की कोशिश कर सकते हैं.

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