Cotton Import Duty: सस्ते होंगे कपड़े, कपास पर लगने वाली 11% इंपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह हटी, टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

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Cotton Import Duty: जहां एक तरफ देशभर में महंगाई की मार का सामना जनता को करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री को थोड़ा राहत दी है. भारत सरकार ने हाल ही में कपास (Cotton) के आयात पर लगने वाले टैक्स को हटा दिया है. इस फैसले से कपड़ा उद्योग इंडस्ट्रीज की चांदी ही चांदी हो गई है.

पांच महीने की राहत
दरअसल सरकार ने 1 जून 2026 से लेकर 30 अक्टूबर 2026 तक के लिए टेक्सटाइल उद्योग को ये राहत दी है. सरकार ने कॉटन के आयात पर लगने वाली सभी कस्टम ड्यूटी हटा दी है. इस फैसले के बाद सोमवार को कई टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली. वर्धमान टेक्सटाइल्स, गोकालदास एक्सपोर्ट्स, अरविंद, वेलस्पन लिविंग, ट्राइडेंट, केपीआर मिल और रेमंड लाइफस्टाइल के शेयर 2% से 7% तक बढ़ गए हैं. वहीं इंडो काउंट इंडस्ट्रीज का शेयर सबसे ज्यादा करीब 11% बढ़ गया है.

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क्यों लिया गया फैसला?
सरकार का मानना है कि इससे टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री को सस्ती और बेहतर गुणवत्ता वाली कपास मिलेगी. इससे कंपनियों की लागत घटेगी और वो विदेशी बाजारों में ज्यादा अच्छी तरह से कॉम्पिटीशन दे पाएंगी. 

टेक्सटाइल वैल्यू चेन को होगा फायदा
AEPC (अपैरेल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) के चेयरमैन ए सक्थिवल ने कहा कि हाल के महीनों में कपास और यार्न की बढ़ती कीमतों से MSME कंपनियां परेशान थीं. ड्यूटी हटने से घरेलू कपास की कीमतें थोड़ी कंट्रोल होंगी. उन्होंने स्पिनिंग मिलों से भी अपील की है कि वो कम लागत का फायदा यार्न की कीमतों में कमी के रूप में ग्राहकों तक पहुंचाएं.

वहीं कंफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने कहा कि 11% आयात शुल्क हटाने का फैसला टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग के लिए बड़ी राहत है. इससे भारत को 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.

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इंडस्ट्रीज को होगा फायदा
सरकार के इस फैसले से आम कपड़ा इंडस्ट्री के साथ ही आम जन को भी फायदा पहुंचेगा. इससे कपास की उपलब्धता बढ़ेगी. यार्न (धागे) और कपड़ा बनाने की लागत भी कम होगी. छोटे और मीडियम उद्योगों (MSME) को राहत मिलेगी. टेक्सटाइल निर्यातकों को विदेशी ऑर्डर हासिल करने में मदद मिलेगी. घरेलू बाजार में कपास और यार्न की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है.



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