RBI Rule: जब्त जमीनों-मकानों पर आरबीआई का हंटर, बैंकों के लिए बनाया नया नियम, आप पर क्या होगा असर?

381726b416529f00d9f0a4839b34438517842737819781379 original


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • यह पारदर्शिता बढ़ाएगा, ‘सेटिंग’ रोकेगा, आम खरीदार लाभान्वित होंगे.

RBI Rules: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन न चुका पाने की स्थिति में जब्त की गई अचल संपत्तियों- जमीन, मकान या दुकान- की बिक्री को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को कहा कि अब बैंकों को खराब लोन (bad loans) के बदले हासिल की गई अचल संपत्तियों (immovable assets) को सात साल के अंदर बेचना होगा. यह बिक्री ‘सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट  सिक्योरिटी इंटरेस्ट’ (SARFAESI) एक्ट के नियमों के तहत सार्वजनिक नीलामी के जरिए की जानी चाहिए.

‘सेटिंग का खेल’ अब खत्म

रिजर्व बैंक ने अपने नए फैसले के तहत कहा कि बैंक इन संपत्तियों को वापस से उसी डिफॉल्टर, उसके रिश्तेदारों या उससे जुड़ी किसी भी पार्टी को नहीं बेच सकता है. RBI ने बैंकों की तरफ से दिए गए उस सुझाव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उधारकर्ताओं को अपनी संपत्ति वापस से खरीदने के लिए एक मौका दिए जाने की बात कही गई थी.

RBI के इस कदम का मकसद बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाने और सेटिंग वाले गेम या भ्रष्टाचार को खत्म करना है. पहले कई रसूखदार डिफॉल्टर जानबूझकर इसलिए डिफॉल्ट करते थे ताकि जब जब्त की गई उनकी संपत्ति की नीलामी होगी, तो वे अपने किसी रिश्तेदार, बिजनेस पार्टनर, दोस्त या बेनामी कंपनी के जरिए कम बोली लगाकर उसे खरीद लेंगे. इससे उनका पुराना कर्ज भी साफ हो जाएगा और प्रॉपर्टी भी उनकी अपनी रह जाएगी. आरबीआई का नया नियम सेटिंग के इस खेल पर किया गया प्रहार है.

7 साल की तय की गई समयसीमा

आरबीआई के नए नियमों के अनुसार, बैंक किसी भी जब्त संपत्ति को हमेशा के लिए या अनिश्चितकाल के लिए अपने पास नहीं रख सकते हैं. उन्हें सात साल के भीतर इसे बेचना होगा. 

आम जनता पर असर

आरबीआई का यह नया नियम आम खरीदारों के लिए फायदेमंद साबित होगा क्योंकि सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होगी. आम जनता को भी नीलामी में बाजार मूल्य पर जमीन या घर खरीदने का मौका मिलेगा. इससे लोन न चुकाने की प्रवृत्ति में भी कमी आएगी. बैंकों को जब उनका पैसा सही समय पर मिलेगा, तो आगे आने वाले समय में आम ग्राहकों के लिए लोन लेने की प्रक्रियाएं आसान होगी. ब्याज दरों पर भी इसका असर दिख सकता है.

ये भी पढ़ें:

UPI Tax: 2000 से ऊपर के डिजिटल पेमेंट पर लगेगा टैक्स, सरकार ने कर ली तैयारी, बन रहा नियम 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *