RBI Foreign Currency Sale: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के सामने ऐसी मुसीबत तो कोरोना काल में भी नहीं आई थी, जैसी अब आई है. RBI ने हालिया बुलेटिन में बताया कि ईरान जंग शुरू होने के बाद मार्च में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट दर्ज गई, जिसकी वजह से विदेशी मुद्रा भंडार में से करीब 94 हजार करोड़ रुपये कीमत के डॉलर की खुले बाजार में बिक्री करनी पड़ी. इसका मकसद भारतीय रुपये की कमजोरी को रोकना था.
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी मुद्रा लेनदेन से कुल 1.69 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है. विदेशी मुद्रा लेनदेन से होने वाला यह मुनाफा, बीते वित्त वर्ष के मुकाबले में 52 प्रतिशत ज्यादा है. वित्त वर्ष 2025 में आरबीआई ने डॉलर बेचकर 1.11 लाख करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था. भारतीय मुद्रा की तेजी से गिर रही वैल्यू और बाजार में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की बिक्री बढ़ा दी थी.
RBI क्यों बेचता है विदेशी मुद्रा?
भारतीय रिजर्व बैंक देश के विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक है. उसके पास डॉलर, यूरो, पाउंड, जैसी मुद्राओं में संपत्तियां होती है. यह बात समझना जरूरी है कि RBI ने रूपये में गिरावट को रोकने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए कई बार डॉलर बेचे हैं. इसी सक्रीय हस्तक्षेप और विदेशी परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन से उसे बड़ी आय मिली है. यह किसी कंपनी का मुनाफा नहीं बल्कि आरबीआई प्रबंधन, निवेश आय और विदेशी मुद्रा संचालन का परिणाम है.
डॉलर बिक्री से कमाई कैसे हुई
जानकारों का कहना है कि जब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचता है तो उसे फायदा होता है. वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी मूल से RBI की कुल इनकम 27% बढ़कर 3.28 लाख करोड़ रुपये हो गई. केंद्रीय बैंक के खातों के मुताबिक, विदेशी मूल से होने वाली इनकम में विदेशी गारंटी को रखने से मिलने वाली ब्याज आय में 11% की बढ़ोतरी शामिल है. यह इनकम बढ़कर 1.08 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पहले ये 97,000 करोड़ रुपये थी. यह ब्याज आय मुख्य रूप से विदेशी शेयर में विदेशी मुद्रा भंडार के निवेश और वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में उसके इस्तमाल की वजह से हुई है.