India-US Trade Deal: अमेरिकी ट्रेड एक्ट की वो ‘खतरनाक’ धारा, जिससे सुरक्षा के लिए भारत बना रहा है खास रणनीति

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US Trade Act: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका यानी यूएस व्यापार समझौते की ओर अग्रसर होते दिख रहे हैं. हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले दौर की करीब सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं. जैसे-जैसे बातचीत आखिरी चरण में दाखिल हो रही है, एक बेहद जरूरी मुद्दा भी अब सुर्खियां बटौर रहा है.

अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 क्या है?

दरअसल  अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की एक धारा है. ये धारा है 301. धारा 301 का इस्तेमाल अमेरिका अन्य देशों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी वाली व्यापार रणनीतियों से निपटने के लिए करता है. इस प्रावधान के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूटीआर) को विदेशी सरकारों की जांच करने और उनकी नीतियों को अमेरिकी व्यवसायों या व्यापारिक हितों के लिए नुकसान पाए जाने पर जवाबी कार्रवाई करने की इजाजत देता है. 

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धारा 301 का इस्तमाल कब किया जा सकता है?

अमेरिका यूएसटीआर धारा 301 के तहत जांच शुरू कर सकता है, अगर उसे लगता है कि किसी देश की व्यापार नीतियां अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करती हैं या अमेरिकी व्यवसायों को अनुचित रूप से नुकसान पहुंचाती हैं. जिसमें जबरन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, श्रम अधिकारों का उल्लंघन, अत्यधिक उत्पादन को बढ़ावा देने वाली बड़ी सरकारी सब्सिडी जैसी चिंताएं शामिल हैं. 

व्यापार समझौते से मिलेगी राहत?

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर दोनों देश 24 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते पर पहुंच जाते हैं तो अमेरिका संभवतः भारत को यह आश्वासन देगा कि धारा 301 के तहत कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा. गौरतलब है कि ऐसे समझौतों के बिना देशों को धारा 301 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर काफी ज्यादा शुल्क का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए ही भारत इस धारा से अपनी सुरक्षा के लिए रणनितियां तैयार कर रहा है.

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