Fish & Milk Myth: क्या मछली खाने के बाद दूध पीने से सच में हो जाते हैं सफेद दाग? एक्सपर्ट से जानें

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Fish & Milk Myth: क्या मछली खाने के बाद आपके घर में भी दूध पीने से मना किया जाता है? अगर हां तो आप इकलौते नहीं है. ज्यादातर भारतीय घरों में मछली के बाद दूध पीने से मना किया जाता है. पुराने समय से ही इस फूड कॉम्बिनेशन को सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि मछली और दूध एक साथ खाने से स्किन पर सफेद दाग हो जाते हैं, तो कोई इस फूड कॉम्बिनेशन को गैस और अपच जैसी समस्याओं से जोड़ता है. इस मान्यता में कितनी सच्चाई है या यह महज एक अंधविश्वास है. आइए जानते हैं….

सफेद दाग क्या होता है?

विटिलिगो (Vitiligo) एक त्वचा संबंधी बीमारी है, जिसमें त्वचा के कुछ हिस्सों का रंग धीरे-धीरे सफेद पड़ने लगता है. यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब त्वचा में मेलानिन बनाने वाली कोशिकाएं जिन्हें मेलानोसाइट्स कहते हैं किसी कारण से नष्ट हो जाती हैं या सही ढंग से काम करना बंद कर देती हैं. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और शरीर के किसी भी हिस्से पर दिख सकती है. यह बीमारी कवक संक्रमण या मेलानोसाइट्स नामक वर्णक बनाने वाली कोशिकाओं के नष्ट होने का परिणाम होती है, केवल मछली और दूध के संयोजन से यह स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकती.

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 मछली और दूध को लेकर फैली मान्यता 

आयुर्वेद और लोक परंपराओं में मछली और दूध को “विरुद्ध आहार” माना गया है. यानी ऐसा भोजन जिनका एक साथ सेवन शरीर के लिए हानिकारक बताया गया है. इसी आधार पर पीढ़ियों से यह धारणा चली आ रही है कि दोनों को साथ खाने से त्वचा रोग विशेषकर सफेद दाग हो सकते हैं. यह मान्यता इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि लोग बिना किसी प्रमाण के इसे सच मान लेते हैं.  

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, मछली और दूध का एक साथ सेवन करने से सफेद दाग होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण आज तक सामने नहीं आया है. विशेषज्ञों के अनुसार, विटिलिगो का मुख्य कारण ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है,  जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपनी ही मेलानोसाइट कोशिकाओं पर हमला करने लगती है. इसके अलावा आनुवंशिक कारक और पर्यावरणीय तत्व भी इस बीमारी में भूमिका निभाते हैं. अब तक हुई किसी भी प्रमाणिक रिसर्च में मछली-दूध के संयुक्त सेवन और सफेद दाग के बीच कोई सीधा संबंध सिद्ध नहीं हुआ है.

आयुर्वेद क्या कहता है? 

आयुर्वेद के अनुसार, दूध की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है. जबकि मछली की तासीर गर्म होती है और यह शरीर में गर्माहट बनाए रखता है. ऐसे में अगर मछली और दूध को एक साथ लिया जाता है तो पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. मछली और दूध को एक साथ लेने से पाचन-तंत्र गड़बड़ा सकता है.

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