Obesity Myths: कम खाने से नहीं घटता वजन, मोटापे से जुड़े इन बड़े मिथकों का एक्सपर्ट ने बताया पूरा सच

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Common Obesity Myths Explained By Experts: मोटापा दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली हेल्थ समस्याओं में से एक है. इसकी वजह यह नहीं है कि साइंस के पास जवाब नहीं हैं, बल्कि समस्या यह है कि वर्षों से चली आ रही गलत धारणाओं, भ्रामक डाइट सलाह और सामाजिक पूर्वाग्रहों ने सही जानकारी को पीछे धकेल दिया है. वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक और सीओओ सलोनी पालीवाल के अनुसार, मोटापे को लेकर कई ऐसे मिथक हैं जो न केवल गलत हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं.

क्या लाइफस्टाइल की वजह से ऐसा होता है?

सबसे बड़ा भ्रम यह है कि मोटापा केवल व्यक्ति की लाइफस्टाइल का परिणाम होता है. जबकि रिसर्च बताते हैं कि इसके पीछे जैनेटिक, हार्मोन, नींद, तनाव, आंतों के माइक्रोबायोम और पर्यावरण जैसे कई कारक मिलकर काम करते हैं.  यही कारण है कि एक जैसी डाइट और समान शारीरिक गतिविधि के बावजूद दो लोगों का वजन अलग-अलग हो सकता है. 

क्या कम खाने से यह ठीक हो जाता है?

दूसरा आम मिथक है कि “कम खाओ और ज्यादा चलो-फिरो” ही इसका समाधान है. सलोनी पालीवाल बताती हैं कि यह सलाह पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन मोटापे जैसी जटिल और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी के इलाज के लिए पर्याप्त भी नहीं है. भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन और शरीर की मेटाबॉलिज्म इस प्रक्रिया को कहीं अधिक मुश्किल बनाते हैं.

क्या वजन कम न होना आपकी जिम्मेदारी है?

इसी तरह कई लोग मानते हैं कि वजन कम न कर पाने के पीछे इच्छाशक्ति की कमी जिम्मेदार होती है. जबकि घ्रेलिन, लेप्टिन, इंसुलिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन भूख और खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं. ऐसे में केवल और मेहनत करो कहना समस्या का समाधान नहीं है. एक्सपर्ट का कहना है कि हर मोटापा बाहर से दिखाई नहीं देताच कई लोगों में शरीर के अंदर अंगों के आसपास चर्बी जमा होती है, जिसे विसरल ओबेसिटी कहा जाता है. दक्षिण एशियाई आबादी में यह जोखिम विशेष रूप से अधिक देखा जाता है. इसलिए केवल वजन या बीएमआई के आधार पर स्वास्थ्य का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता. 

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क्या एक बार वजन घटने के बाद दोबारा बढ़ सकता है?

एक और बड़ी गलतफहमी यह है कि एक बार वजन घट जाने के बाद वह हमेशा कम बना रहता है. रिसर्च बताते हैं कि शरीर अपने पुराने वजन को बनाए रखने की कोशिश करता है, जिससे समय के साथ वजन दोबारा बढ़ने की संभावना रहती है. इसी वजह से मोटापे के लिए लंबे समय तक मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ सकती है. जीएलपी-1 दवाओं जैसे सेमाग्लूटाइड और टिरजेपाटाइड को लेकर भी कई मिसकनसेप्शन हैं. हालांकि क्लीनिकल ट्रायल्स में इन दवाओं ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं और ये भूख तथा मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में मदद करती हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, इनका उपयोग आसान रास्ता चुनना नहीं, बल्कि सही तरीके से इलाज करवाना होता है. 

क्या मोटापा कोई बीमारी है?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन और दुनिया की प्रमुख एंडोक्राइनोलॉजी संस्थाएं मोटापे को एक क्रॉनिक बीमारी मानती हैं. यह टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, स्लीप एपनिया और कई प्रकार के कैंसर जैसी 200 से अधिक बीमारियों से जुड़ी हुई है. इसलिए मोटापे को केवल वजन बढ़ने की समस्या मानना सही नहीं है, बल्कि इसे एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के रूप में समझना और समय रहते उपचार लेना जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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