What We Can Learn From Sundar Pichai’s Leadership Style: दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक गूगल का नेतृत्व करने वाले सुंदर पिचाई की एक खास बात अक्सर लोगों का ध्यान खींचती है. वह है उनका शांत स्वभाव. चाहे किसी सरकारी समिति के सामने कठिन सवालों का जवाब देना हो, कंपनी से जुड़े विवादों का सामना करना हो या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज होती दौड़ में गूगल को आगे बनाए रखना हो, सुंदर पिचाई शायद ही कभी घबराए हुए या भावनात्मक प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आप उनसे क्या सीख सकते हैं.
तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए
सुंदर पिचाई के काम करने के तरीके से पहली सीख मिलती है कि किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए. उनके साथ काम कर चुके कई लोग बताते हैं कि वह एक अच्छे लिसनर हैं. जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है तो अक्सर सामने वाले की बात पूरी सुने बिना ही जवाब तैयार करने लगता है. लेकिन पिचाई पहले पूरी बात समझने की कोशिश करते हैं और फिर प्रतिक्रिया देते हैं. यही कारण है कि उनके फैसले अधिक संतुलित नजर आते हैं. कई बार कुछ मिनट रुककर सोचना किसी भी विवाद को बढ़ने से रोक सकता है.
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समस्या का समाधान खोजने पर ध्यान दें
दूसरी महत्वपूर्ण सीख है कि समस्या का समाधान खोजने पर ध्यान दें, अपने अहंकार की रक्षा करने पर नहीं. बड़े संगठनों में मतभेद होना सामान्य बात है. लेकिन कई लोग समाधान ढूंढ़ने के बजाय यह साबित करने में लग जाते हैं कि वही सही हैं. सुंदर पिचाई को हमेशा सहयोगी नेतृत्व शैली के लिए जाना जाता है. वह बहस जीतने से ज्यादा बेहतर नतीजे हासिल करने को महत्व देते हैं. यही सोच व्यक्तिगत जीवन में भी मददगार साबित हो सकती है. कई बार रिश्ते इसलिए बिगड़ते हैं क्योंकि हम अपनी बात मनवाने पर अड़ जाते हैं, जबकि असली जरूरत समस्या को सुलझाने की होती है.
दूरगामी सोच रखना
तीसरी और शायद सबसे अहम बात है दूरगामी सोच रखनाय. आज गूगल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सुंदर पिचाई शायद ही कभी घबराहट भरे अंदाज में बात करते दिखाई देते हैं. इसकी वजह यह है कि वह हर चुनौती को लंबे समय के नजरिए से देखते हैं. उनका मानना है कि एक खराब दिन, एक असफल बैठक या एक गलती पूरी यात्रा को तय नहीं करती. चेन्नई से निकलकर दुनिया की सबसे प्रभावशाली टेक कंपनियों में से एक के सीईओ बनने तक का उनका सफर भी इसी धैर्य और निरंतर प्रयास का उदाहरण है.
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