Kidney Health Tips: किडनी खराब होने से पहले शरीर नहीं देता बड़ा संकेत, डॉक्टर की चेतावनी- देर होने का न करें इंतजार

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Kidney Health Tips: हम में से ज्यादातर लोग मानते हैं कि कोई भी गंभीर बीमारी आने से पहले शरीर कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है. लेकिन किडनी की बीमारी के मामले में अक्सर ऐसा नहीं होता. यही वजह है कि डॉक्टर इसे “साइलेंट डिजीज” यानी चुपचाप बढ़ने वाली बीमारी कहते हैं. वहीं किडनी हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है. यह खून को साफ करती है, शरीर से गंदगी बाहर निकालती है, पानी का संतुलन बनाए रखती है और तो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है. लेकिन किडनी की सबसे बड़ी खासियत ही कई बार सबसे बड़ा खतरा बन जाती है.

 डॉक्टरों के मुताबिक किडनी इतनी मजबूत होती है कि नुकसान होने के बाद भी लंबे समय तक अपना काम करती रहती है. इसी कारण कई लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उनकी किडनी खराब हो रही है, जब तक बीमारी काफी आगे नहीं बढ़ जाती. 

किडनी की बीमारी को क्यों कहा जाता है ‘साइलेंट किलर’?

विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में कोई साफ लक्षण नहीं दिखते. वहीं कई लोग पूरी तरह सामान्य जीवन जीते रहते हैं और उन्हें लगता है कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं.  लेकिन अंदर ही अंदर किडनी लगातार कमजोर होती रहती है.  डॉक्टर के अनुसार, जब लोगों को पहली बार बीमारी का पता चलता है, तब तक कई मामलों में किडनी अपनी 85 से 90 प्रतिशत तक क्षमता खो चुकी होती है. यही वजह है कि केवल लक्षणों का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है. वहीं कई मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है जब किसी सामान्य हेल्थ चेकअप में रिपोर्ट खराब आती है या फिर अचानक ऐसी स्थिति बन जाती है कि डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगती है. इसलिए डॉक्टर बार-बार लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह देते हैं. 

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देर से पता चलने पर मरीज और परिवार दोनों पर पड़ता है असर

किडनी की बीमारी का देर से पता चलना सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बड़ा झटका साबित हो सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि कई मामलों में ऐसा होता है कि मरीज अस्पताल पहुंचते समय खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं, लेकिन जांच के बाद उन्हें पता चलता है कि उनकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी होती है. ऐसे में मरीज और उनके परिवार दोनों के लिए इस सच्चाई को स्वीकार करना आसान नहीं होता. वहीं अचानक डायलिसिस, लंबे इलाज और भविष्य की चिंता लोगों को परेशान कर देती है.  इलाज का खर्च, जीवनशैली में बदलाव और आगे की योजना जैसी कई बातें एक साथ सामने आ जाती हैं. यही कारण है कि डॉक्टर कहते हैं कि बीमारी को शुरुआती दौर में पकड़ लेना सबसे बेहतर रास्ता है. 

किन लोगों को ज्यादा खतरा और कैसे बचाएं अपनी किडनी?

डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में किडनी की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. इनमें डायबिटीज के मरीज, हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोग, किडनी की बीमारी का पारिवारिक इतिहास रखने वाले लोग, मोटापे से जूझ रहे व्यक्ति, धूम्रपान करने वाले, दिल के मरीज और 60 साल से अधिक उम्र के लोग शामिल होते हैं.   इसलिए ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी की जांच कराने कि सलाह दी जाती है. 

वहीं अच्छी बात यह है कि किडनी को सुरक्षित रखने के लिए बहुत मुश्किल कदम उठाने की जरूरत नहीं होती. इसके लिए ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रण में रखना, पर्याप्त पानी पीना, कम नमक वाला संतुलित भोजन खाना, नियमित व्यायाम करना, धूम्रपान और ज्यादा शराब से बचना तथा बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाओं का अधिक इस्तेमाल न करना किडनी को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है. डॉक्टरों का साफ कहना है कि किडनी की बीमारी का इंतजार लक्षणों से नहीं, बल्कि समय पर जांच से करना चाहिए. क्योंकि सही समय पर पता चल जाए तो किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. 

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