Indian Thali: क्या भारतीय थाली सच में बढ़ाती है डायबिटीज, जानें किन लोगों के लिए सही नहीं है दाल-रोटी?

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Does Indian Thali Increase Diabetes Risk: भारत में खाने की बात हो और थाली में दाल, रोटी और चावल न हों, ऐसा कम ही देखने को मिलता है. कई घरों में आज भी लोग एक ही भोजन में चावल और रोटी दोनों खाते हैं. यह सिर्फ स्वाद या आदत का मामला नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है. लेकिन अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यही आदत कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

क्यों हो रही है दिक्कत?

भारत पहले से ही दुनिया में सबसे ज्यादा डायबिटीज मरीजों वाले देशों में गिना जाता है. ऐसे में डॉक्टर अब उन खानपान की आदतों पर भी नजर डाल रहे हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाने और मोटापे का जोखिम बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं. सीके बिरला हॉस्पिटल, जयपुर की सीनियर डाइटिशियन दिव्या जैन बताती हैं कि समस्या दाल, रोटी या चावल में नहीं है, बल्कि इन्हें किस मात्रा में और किस तरह खाया जा रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है.

भारतीय थाली किन लोगों को कर रही बीमार?

दरअसल, एक सामान्य भारतीय थाली में अक्सर चावल, रोटी, आलू की सब्जी, दाल, मिठाई और कभी-कभी मीठे पेय भी शामिल होते हैं. इनमें से ज्यादातर चीजें कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती हैं. जब एक ही भोजन में कई कार्ब स्रोत शामिल हो जाते हैं, तो शरीर पर ग्लूकोज का भार बढ़ जाता है. इसका असर खासतौर पर उन लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है जो पहले से प्रीडायबिटीज, डायबिटीज, मोटापे, हाई ब्लड प्रेशर या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.

क्या करते हैं हम गलती?

दिव्या जैन कहती हैं कि आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों की थाली में कार्बोहाइड्रेट तो भरपूर होता है, लेकिन प्रोटीन और फाइबर की मात्रा कम होती है। कई लोग दो-तीन रोटियों के साथ चावल भी खाते हैं, जबकि पनीर, दही, अंडे, मछली, चिकन या दाल जैसी प्रोटीन वाली चीजें सीमित मात्रा में लेते हैं, वहीं सब्जियों को अक्सर सिर्फ साइड डिश की तरह देखा जाता है.

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हमें किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

आधुनिक लाइफस्टाइल ने इस समस्या को और बढ़ाया है। पहले लोग अधिक शारीरिक मेहनत करते थे, जिससे शरीर अतिरिक्त एनर्जी का उपयोग कर लेता था. लेकिन अब लंबे समय तक बैठकर काम करना, कम शारीरिक गतिविधि और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा रहा है. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको चावल या रोटी खाना बंद कर देना चाहिए. एक्सपर्ट के अनुसार दोनों ही संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं. जरूरत इस बात की है कि थाली का संतुलन सही रखा जाए.

Indian Thali: क्या भारतीय थाली सच में बढ़ाती है डायबिटीज, जानें किन लोगों के लिए सही नहीं है दाल-रोटी?

कैसी होनी चाहिए हमारी थाली?

स्वस्थ थाली के लिए आधी प्लेट में सब्जियां और सलाद रखें. एक चौथाई हिस्से में दाल, पनीर, अंडा, चिकन, मछली या दही जैसे प्रोटीन स्रोत शामिल करें. बाकी एक चौथाई हिस्से में रोटी या चावल रखें. नियमित रूप से बड़ी मात्रा में चावल और रोटी दोनों एक साथ खाने से बचें. एक्सपर्ट का कहना है कि डायबिटीज का खतरा किसी एक खाद्य पदार्थ से नहीं, बल्कि लंबे समय तक बनी असंतुलित खाने की आदतों से बढ़ता है. इसलिए दाल-रोटी छोड़ने की नहीं, बल्कि थाली को संतुलित बनाने की जरूरत है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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