States With Highest Infant Mortality Rate In India: भारत में इन्फेंट फर्टिलिटी रेट में पिछले एक दशक के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु दर घटकर 24 रह गई है. साल 2019 में यह आंकड़ा 30 था. यह सुधार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और संस्थागत प्रसव में हुई बढ़ोतरी का परिणाम माना जा रहा है. हालांकि नेशनल लेवल पर तस्वीर बेहतर दिखती है, लेकिन राज्यों के बीच अब भी बड़ा अंतर मौजूद है.
42 में से एक बच्चे नहीं देख पाते पहला जन्मदिन
रिपोर्ट बताती है कि भारत में अब भी हर 42 में से एक शिशु अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाता. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है, जहां हर 37 में से एक शिशु की एक साल की उम्र से पहले मौत हो जाती है. शहरी इलाकों में यह अनुपात बेहतर है और वहां हर 59 में से एक शिशु की मृत्यु दर्ज की गई. एक्सपर्ट का मानना है कि संस्थागत प्रसव में वृद्धि ने शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्ष 2019 में जहां 83 प्रतिशत से कम प्रसव अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहे थे, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा 95 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया. इसके बावजूद रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि केवल अस्पताल में प्रसव कराने से ही समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि जन्म के बाद नवजात की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
किन राज्यों में स्थिति सबसे बेकार
राज्यों की बात करें तो छत्तीसगढ़ सबसे चिंताजनक स्थिति में दिखाई देता है. यहां शिशु मृत्यु दर 36 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई, जो देश में सबसे अधिक है. इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का स्थान रहा, जहां यह आंकड़ा 35 रहा।.नवजात मृत्यु दर के मामले में भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर रहे, जबकि उत्तर प्रदेश भी चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है.
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किन राज्यों में बेहतर है स्थिति
इसके उलट गोवा और सिक्किम देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य बनकर उभरे हैं. दोनों राज्यों में शिशु मृत्यु दर केवल 7 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई. केरल 8 के साथ तीसरे स्थान पर रहा. तमिलनाडु और दिल्ली में यह आंकड़ा 11, जबकि त्रिपुरा में 12 दर्ज किया गया. महाराष्ट्र ने 14, कर्नाटक ने 15, पंजाब ने 16, तेलंगाना ने 17 और आंध्र प्रदेश ने 18 की दर दर्ज कर राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया.
अब भी क्या है सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि सबसे बड़ी चुनौती अब भी नवजात शिशुओं की मौत है. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में होने वाली कुल शिशु मौतों में करीब 73 प्रतिशत मौतें जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर हुईं. एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले वर्षों में शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए गर्भावस्था के दौरान बेहतर देखभाल, मातृ पोषण, सुरक्षित प्रसव और जन्म के बाद नवजात की क्वालिटी मेडिकल सेवाओं पर अधिक ध्यान देना होगा. भारत ने इस दिशा में लंबी दूरी तय की है, लेकिन अभी भी कई राज्यों में सुधार की बड़ी गुंजाइश बनी हुई है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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