Postmortem: पोस्टमॉर्टम से कैसे पता लगती है मौत की वजह, जानिए क्या संकेत देते हैं शरीर के ऑर्गन?

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How Doctors Find Cause Of Death In Postmortem: पोस्टमॉर्टम यानी ऑटोप्सी सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह मौत के पीछे छिपी असली वजह तक पहुंचने का सबसे अहम तरीका मानी जाती है. जब किसी व्यक्ति की अचानक, संदिग्ध या असामान्य परिस्थितियों में मौत होती है, तब डॉक्टर शरीर के हर महत्वपूर्ण अंग की बारीकी से जांच करते हैं. इसी जांच के जरिए यह समझा जाता है कि आखिर मौत कैसे और किन कारणों से हुई. 

कैसे पता चलता है मौत के बारे में?

नेशनल हेल्थ सर्विस के मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शरीर का हर ऑर्गन मौत से पहले की स्थिति के बारे में कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है. उदाहरण के लिए अगर दिल की आर्टरीज में ब्लॉकेज, सूजन या खून का थक्का दिखाई दे, तो हार्ट अटैक की संभावना मानी जाती है. वहीं लंग्स में पानी भरना, इंफेक्शन या जलन जैसे संकेत सांस रुकने, जहरीली गैस या फेफड़ों की बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं.  ब्रेन की जांच भी पोस्टमॉर्टम का बेहद अहम हिस्सा होती है. यदि दिमाग में ब्लीडिंग, सूजन या चोट के निशान मिलते हैं, तो एक्सपर्ट्स इसे स्ट्रोक, सिर पर चोट या किसी बाहरी हमले से जोड़कर देखते हैं. इसी तरह लीवर और किडनी की स्थिति से शरीर में जहर, ड्रग्स या लंबे समय से चली आ रही बीमारी का अंदाजा लगाया जा सकता है.

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रिपोर्ट में क्यों लगता है समय?

दरअसल, पोस्टमॉर्टम के दौरान सिर्फ आंखों से देखकर ही फैसला नहीं लिया जाता. कई बार ऑर्गन और टिश्यू के छोटे सैंपल लेकर उन्हें लैब में भेजा जाता है. वहां माइक्रोस्कोप और केमिकल टेस्ट के जरिए बीमारी, इंफेक्शन, जहर या शरीर के अंदरूनी नुकसान का पता लगाया जाता है. यही वजह है कि कई मामलों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने में कई हफ्तों का समय लग जाता है. ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ पैथोलॉजिस्ट्स और ह्यूमन टिश्यू अथॉरिटी के मानकों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम सिर्फ मौत की वजह जानने के लिए ही नहीं, बल्कि बीमारियों को बेहतर तरीके से समझने और भविष्य में इलाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी किया जाता है. 

छोटे- छोटे जांच होते हैं जरूरी

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि शरीर पर मौजूद छोटे-छोटे निशान भी जांच में बेहद अहम साबित होते हैं. त्वचा का रंग बदलना, नाखूनों का नीला पड़ना, शरीर पर चोट या गला दबने के निशान जैसे संकेत मौत के तरीके को समझने में मदद करते हैं. कई बार अंदरूनी अंगों की स्थिति और बाहरी चोटों के बीच तुलना करके यह तय किया जाता है कि मौत नेचुरल थी, हादसा था या फिर किसी अपराध से जुड़ी हुई. पोस्टमॉर्टम के बाद पैथोलॉजिस्ट अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिसमें मौत की संभावित वजह, शरीर के अंदर मिले संकेत और लैब टेस्ट के नतीजे शामिल होते हैं. यही रिपोर्ट बाद में पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन जाती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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