Gold News: जब भारतीय सोना खरीदते हैं तो डॉलर क्यों हो जाता है कमजोर? समझें गणित

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Gold vs Dollar: भारत में सोना खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. लोग कई मौकों पर सोना खरीदते हैं. खासतौर से शादी, त्यौहार जैसे मौके पर तो सबसे ज्यादा सोना खरीदा जाता है. भले ही सोने की कीमत कितनी भी क्यों ना बढ़ जाए लेकिन शगुन के लिए सोना तो खरीदते ही हैं. ना केवल शगुन के लिए बल्कि कई लोग तो सोना निवेश के रूप में भी खरीदते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि जब भी भारत में कोई सोना खरीदता है तो अमेरिका में डॉलर कमजोर हो जाता है? नहीं जानते होंगे ना, आइये बताते हैं ऐसा क्यों.

सोना खरीदने पर पड़ता इकोनॉमी पर असर
सोना भारत में एक इमोशनल एसेट है, लेकिन इसका हिडन फंडा ये है कि जब भी इंडिया में ज्यादा गोल्ड खरीदा जाता है, तो इसका असर केवल ज्वेलरी मार्केट पर ही नहीं पड़ता है, बल्कि पूरी इकोनॉमी पर इसका प्रेशर पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे डॉलर कमजोर होता है. डॉलर कमजोर होता है तो इसका असर भारतीय इकोनॉमी पर भी पड़ता है.

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डॉलर क्यों होता है कमजोर?
ये तो हम सभी जानते हैं कि भारत में सोने का उत्पादन नहीं होता, बल्कि सोना आयात किया जाता है. जो सोना भारत दूसरे देशों से खरीदता है उसका पेमेंट भारतीय रुपये में नहीं होता है बल्कि डॉलर्स में होता है. यहां से ही असली खेल शुरू होता है. क्योंकि आप जब भी किसी ज्वेलर से सोना खरीदते हैं, तो वो उसे आयात करता है, ऐसे में भारत को बाहर पेमेंट करना पड़ता है और उसके लिए डॉलर खरीदने पड़ते हैं.

इसका मतलब है कि भारत के लिए सोना खरीदना, डॉलर को खर्च करने के बराबर होता है. जब डॉलर की डिमांड बढ़ती है तो रुपया कमजोर होने लगता है.

RBI का भी है इसमें रोल
जब रुपये पर किसी भी तरह का प्रेशर पड़ता है, तब RBI अपने फॉरेक्स रिजर्व से डॉलर्स बेचता है जिससे रुपया स्टेबल रहे. इसका मतलब है कि सोने की बढ़ती मांग सीधे तौर पर भारत के विदेशी मुद्र भंडार पर भी असर डालती है. ये कोई छोटी बात नहीं है, क्योंकि सोने का आयात भारत के लिए एक बड़ा आयात है. मतलब जिसका ज्यादा सोना आयात किया जाता है उतना ही बड़ा व्यापारिक घाटा भारत तो उठाना पड़ता है. और व्यापारिक घाटा बढ़ने का मतलब है कि इकोनॉमी पर प्रेशर पड़ने वाला है.

Gold इम्पोर्ट ड्यूटी क्यों बदलती है सरकार?
सोने पर लगने वाला आयात शुल्क, यानी इम्पोर्ट ड्यूटी बार बार सरकार के द्वारा बदली जाती है, जानते हैं क्यों? नहीं जानते होंगे, तो हम बताते हैं. दरअसर ये सरकार का तरीका है क्योंकि आयात शुल्क बढ़ाने पर सोना महंगा हो जाता है, लोग इसे कम खरीदते हैं और डॉलर का निकलना कम हो जाता है.

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हालांकि ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी का एक साइड इफैक्ट भी है, स्मगलिंग. इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने की वजह से व्यापारी तस्करी करने लगते हैं. सरकार को इससे बचने के लिए बैलेंस बनाकर रखना पड़ता है.

डॉलर में ही क्यों होती है गोल्ड की पेमेंट?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें डॉलर सिस्टम पर ही आधारित रहती हैं. इस वजह से ही भारतीय कहीं से भी सोना खरीदें उन्हें इंटरनेशनल मार्केट में USD में ही सेटलमेंट करना पड़ता है.

इसका साफतौर पर मतलब ये है कि आपका सोना सिर्फ पर्सनल इनवेस्टमेंट नहीं है, बल्कि वो पूरी तरह से डॉलर डिमांड, रुपया की ताकत, फॉरेक्स रिजर्व और इंडिया के व्यापार से जुड़ा होता है. ये केवल एक कल्चरल आदत ही नहीं है बल्कि पूरी तरह से भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है. इसलिए सरकार जब भी गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी के बारे में बात करती है तो वो पूरे भारत की अर्थव्यवस्था की बात करती है.



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